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हूती विद्रोहियों ने यमन के मोखा पर किया कब्जा, पिछले 9 दिनों से जारी था संघर्ष

यमन में ईरान के करीबी माने जाने वाले हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के अहम बंदरगाह शहर मोखा पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। यह इलाका बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बेहद करीब है जो लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच एक महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। मोखा पर कब्जे को हूतियों की बड़ी रणनीतिक बढ़त माना जा रहा है

मोखा में हूतियों और सरकार समर्थित बलों के बीच कई दिनों से संघर्ष चल रहा था। इससे पहले शहर पर नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज का नियंत्रण था। इन बलों को यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन हासिल है। हालिया लड़ाई के बाद हूतियों ने पश्चिमी तट पर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है।

ताइज की ओर बढ़ने की कोशिश

मोखा पर नियंत्रण मिलने के बाद हूती लड़ाकों की गतिविधियां ताइज के पश्चिमी हिस्से में भी बढ़ी हैं। रणनीतिक इलाकों पर कब्जे के जरिए वे लाल सागर के तटीय क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे स्थानीय संघर्ष के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका है।

बाब अल-मंदेब क्यों अहम है?

बाब अल-मंदेब दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यहां से गुजरने वाले जहाज आगे लाल सागर और स्वेज नहर की ओर जाते हैं। इसलिए इसके आसपास हूतियों की बढ़ती सैन्य मौजूदगी से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर दबाव बढ़ने की चिंता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रणनीतिक तटीय इलाकों पर पकड़ मजबूत होने से हूतियों के लिए समुद्री यातायात पर निगरानी और दबाव बनाना आसान हो सकता है।

पाकिस्तान के जरिए ईरान को संदेश

इसी बीच सऊदी अरब की ओर से पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को हूतियों के हमले रोकने के लिए संदेश दिए जाने की खबर है। हालांकि, ईरान का कहना है कि वह हूतियों को सीधे नियंत्रित नहीं करता। इस घटनाक्रम ने यमन के संघर्ष को क्षेत्रीय तनाव से और जोड़ दिया है।

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