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MEA ने PoK में अशांति को लेकर पाकिस्तान को लताड़ा, कहा- सुरक्षा बलों की बर्बरता में 90 नागरिकों की हुई मौत…

भारत ने मंगलवार को पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आम नागरिकों पर लगातार हो रहे अत्याचारों के लिए पाकिस्तान की कड़ी आलोचना की। इन अत्याचारों में कम से कम 90 नागरिकों की मौत हुई है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को इसके लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की। ये बातें विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को राजधानी में एक द्विपक्षीय प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहीं।

जब उनसे अनुच्छेद 370 को हटाए जाने की बरसी के मौके पर पाकिस्तानी विश्वविद्यालयों में शटडाउन की मांगों के बारे में पूछा गया, तो जायसवाल ने कहा, “5 अगस्त से जुड़े सवाल पर, सबसे पहले हमें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर में क्या हो रहा है। पाकिस्तानी सेना की बर्बरता में 90 लोग मारे गए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इन अत्याचारों के लिए पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराना चाहिए।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपनी बात रखते हुए पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए तथाकथित चुनावों की भी आलोचना की और वैश्विक समुदाय से अपील की कि वे पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा आम नागरिकों पर किए जा रहे अत्याचारों पर ध्यान दें।

पाकिस्तानी प्रशासन द्वारा आम नागरिकों पर किए जा रहे अत्याचार

“PoK में यह तथाकथित स्थानीय चुनाव पूरी तरह से दिखावा है। असल में वहां जनता का विरोध-प्रदर्शन हो रहा है और पाकिस्तानी सेना अंधाधुंध हत्याएं कर रही है। ऐसी खोखली कवायदें सच्चाई को छिपा नहीं सकतीं।” मीडिया के एक और सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने पाकिस्तान से सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात पर भी जोर दिया।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हम लगातार देशों से सीमा-पार आतंकवाद और इसे बढ़ावा देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आह्वान करते रहे हैं। हम पाकिस्तान से सीमा-पार आतंकवाद और अपनी धरती पर मौजूद आतंकवादी ढांचे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आह्वान करते हैं, जिसे खत्म करने की जरूरत है।”

अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के सात साल बाद, जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) की स्थिति में ज़मीन-आसमान का अंतर है। जहां केंद्र शासित प्रदेश में ज़्यादा स्थिरता और विकास देखा जा रहा है, वहीं PoJK में अशांति, पाबंदियों और जन-विरोध के आरोप लगातार लग रहे हैं।

अनुच्छेद 370 हटने के बाद जहां जम्मू-कश्मीर में बुनियादी ढांचे का विस्तार, बेहतर सार्वजनिक सेवाएं और अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण माहौल देखने को मिल रहा है, वहीं पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर के निवासी और राजनीतिक आवाज़ें शासन, विकास, आर्थिक तंगी और नागरिक स्वतंत्रता पर पाबंदियों को लेकर चिंता जता रही हैं। इससे पिछले सात वर्षों में दोनों क्षेत्रों के विकास के अलग-अलग रास्तों का पता चलता है।

 

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