घर, दुकान और ऑफिस की निगरानी के लिए इंटरनेट से जुड़े CCTV कैमरों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। मोबाइल से दूर बैठकर कैमरे की लाइव फुटेज देखने की सुविधा के कारण लोग इन्हें सुरक्षा के लिए जरूरी मानते हैं। लेकिन अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिक रहे कुछ ऐसे कैमरों को लेकर सवाल उठे हैं, जिन्हें जरूरी सरकारी मंजूरी नहीं मिली थी।
जांच में सामने आया मामला
एक समाचार एजेंसी की जांच में Amazon और Flipkart पर इंटरनेट से जुड़े करीब 770 CCTV कैमरों की लिस्टिंग मिली। इनमें 700 से ज्यादा कैमरों के नाम Bureau of Indian Standards यानी BIS के मंजूर रिकॉर्ड में नहीं पाए गए। मामला सामने आने के बाद दोनों ई-कॉमर्स कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कैमरों की जांच शुरू कर दी है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन उत्पादों के पास जरूरी प्रमाणन है और किन कैमरों की बिक्री नियमों के अनुरूप नहीं है।
मंजूरी नहीं तो हटाए जा सकते हैं कैमरे
जिन कैमरों के लिए जरूरी सरकारी मंजूरी उपलब्ध नहीं है, उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटाए जाने की संभावना है। बिना जरूरी प्रमाणन वाले उत्पादों की बिक्री का मामला सामने आने के बाद अब इनकी लिस्टिंग और दस्तावेजों की जांच पर जोर दिया जा रहा है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इंटरनेट से जुड़े कैमरे केवल सामान्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नहीं हैं। ये लगातार वीडियो रिकॉर्ड करते हैं और नेटवर्क के जरिए डेटा ट्रांसफर कर सकते हैं।
बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर सुरक्षा की चिंता
स्मार्ट CCTV कैमरों का इस्तेमाल घरों से लेकर दुकानों और दूसरे कारोबारी स्थानों तक बढ़ा है। इन कैमरों को इंटरनेट से जोड़ने का फायदा यह है कि यूजर कहीं से भी निगरानी कर सकता है। लेकिन कनेक्टेड डिवाइस होने के कारण इनके साथ साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिम भी जुड़े रहते हैं। बिना जरूरी मानकों और प्रमाणन वाले कैमरों की बिक्री की जानकारी सामने आने के बाद उपभोक्ताओं के लिए भी उत्पाद खरीदने से पहले उसके प्रमाणन और निर्माता की जानकारी जांचना महत्वपूर्ण हो गया है। फिलहाल Amazon और Flipkart की ओर से ऐसे कैमरों की लिस्टिंग की जांच की जा रही है।
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