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Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में सोना, कपड़े और प्रॉपर्टी खरीदने से नाराज होते हैं पितर? जानें शास्त्रों में क्या है मान्यता

Pitru Paksha 2026 Shopping Rules: सनातन धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष समय माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह अवधि आश्विन मास की प्रतिपदा से अमावस्या तक रहती है और इसे ‘सोलह श्राद्ध’ या ‘महालय पक्ष’ भी कहा जाता है। इस दौरान तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। इसी वजह से कई लोग इस दौरान नए कपड़े, सोना, वाहन, संपत्ति या अन्य सामान खरीदने से बचते हैं।

क्या खरीदारी पर है रोक?

लोक मान्यताओं और सुनी-सुनाई बातों के कारण यह धारणा प्रचलित है कि पितृपक्ष में नई चीज खरीदने या नई शुरुआत करने से पितर नाराज हो सकते हैं। हालांकि, दिए गए धार्मिक संदर्भों के अनुसार शास्त्रों में पितृपक्ष के दौरान वस्तुओं की खरीदारी पर कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं बताया गया है। इसलिए केवल खरीदारी को अशुभ मानना एक लोक-मान्यता के रूप में देखा जाता है।

क्या चाहते हैं पितर?

आश्वलायन गृह्यसूत्र, मत्स्य पुराण और गरुड़ पुराण का संदर्भ देते हुए बताया जाता है कि पितृपक्ष को केवल अशुभ अवधि नहीं माना जाना चाहिए। यह पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का समय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितर सूक्ष्म रूप में अपने परिवार के पास आते हैं और अपनी संतान को सुखी और समृद्ध देखकर प्रसन्न होते हैं। इसी संदर्भ में पितरों का आशीर्वाद दीर्घायु, संतान, धन और विद्या से जोड़ा जाता है।

मांगलिक कार्यों से क्यों बचते हैं?

पितृपक्ष में वस्तुओं की खरीदारी पर रोक नहीं मानी गई है, लेकिन इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, सगाई, मुंडन, जनेऊ संस्कार और नए व्यवसाय का शुभारंभ जैसे मांगलिक कार्यों से बचने की परंपरा है। इसका उद्देश्य इस अवधि में परिवार का ध्यान पूर्वजों के तर्पण, श्राद्ध और पितृ-ऋण से मुक्ति जैसे धार्मिक कर्मों पर केंद्रित रखना माना जाता है।

चातुर्मास का भी है संबंध

पितृपक्ष के दौरान मांगलिक कार्यों से दूरी रखने के पीछे चातुर्मास को भी एक कारण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक योगनिद्रा में रहते हैं। यह अवधि लगभग चार महीने की मानी जाती है। इसी कारण चातुर्मास में भी कई शुभ और मांगलिक कार्यों से परहेज करने की परंपरा है।

पितरों के तर्पण पर रहे ध्यान

धार्मिक मान्यताओं में पितृपक्ष को पूर्वजों के स्मरण, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए समर्पित अवधि माना गया है। विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे आयोजनों में उत्सव और उल्लास का माहौल होता है, जबकि पितृपक्ष को गंभीर और संयमित धार्मिक अवधि माना जाता है। इसलिए इन दोनों प्रकार की गतिविधियों को अलग रखने की परंपरा विकसित हुई।

खान-पान और पहनावे में रखें संयम

पितृपक्ष के दौरान सादे और सात्विक कपड़े पहनने की परंपरा बताई जाती है। पूजा और तर्पण के समय सफेद, हल्का पीला या अन्य हल्के रंग के कपड़े पहनने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा कई धार्मिक मान्यताओं में इस अवधि में बाल और दाढ़ी न कटाने तथा मांस, अंडा, मछली, लहसुन-प्याज, शराब और अन्य नशीले पदार्थों से परहेज करने की बात कही गई है।

व्यवहार में भी रखें सावधानी

पितृपक्ष के दौरान घर का वातावरण शांत और सकारात्मक रखने की सलाह दी जाती है। परिवार में झगड़े और विवाद से बचने, असहाय लोगों को परेशान न करने तथा पशु-पक्षियों के प्रति भी दया और सम्मान रखने की धार्मिक मान्यता है। इस दौरान अपशब्द बोलने और झूठ से बचने तथा विनम्र और सम्मानजनक व्यवहार करने पर जोर दिया जाता है। मान्यता है कि ऐसा संयम पितरों के प्रति श्रद्धा को दर्शाता है।

खरीदारी और मांगलिक कार्य में अंतर

कुल मिलाकर, पितृपक्ष में सोना, कपड़े, वाहन या संपत्ति जैसी वस्तुएं खरीदना और विवाह या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक संस्कार करना एक ही बात नहीं है। दिए गए धार्मिक संदर्भों के अनुसार खरीदारी पर स्पष्ट सामान्य रोक नहीं बताई गई है, जबकि मांगलिक संस्कारों से इस अवधि में परहेज करने की परंपरा है। अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में मान्यताएं अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने कुलाचार और स्थानीय धार्मिक परंपरा को भी ध्यान में रखना उचित माना जाता है।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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