पंजाब में लाल लकीर के भीतर बने मकानों में रहने वाले परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान(CM Bhagwant Singh Mann) ने कहा कि राज्य सरकार ने ऐसे घरों के मालिकाना हक को कानूनी पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। धुरी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने परिवारों को संपत्ति स्वामित्व प्रमाण पत्र वितरित किए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना के जरिए उन परिवारों को उनकी संपत्ति का आधिकारिक मालिकाना हक दिया जा रहा है जिनके घर लंबे समय से सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे। स्वामित्व प्रमाण पत्र मिलने के बाद लोगों को अपनी संपत्ति का कानूनी रिकॉर्ड उपलब्ध होगा। इस पहल से गरीब, दलित और भूमिहीन परिवारों को विशेष फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि संपत्तियों की स्पष्ट सीमाएं तय होने और सही नक्शे तैयार होने से जमीन और मकान से जुड़े पुराने विवादों को सुलझाने में भी मदद मिलेगी।
सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होगा मालिकाना हक
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि लाल लकीर में रहने वाले लोगों के ऊपर सरकार या अदालत से जुड़े मालिकाना हक के विवाद की अनिश्चितता अब खत्म करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि संपत्ति का विधिवत रिकॉर्ड तैयार होने से लोगों को भविष्य में अपनी जमीन-मकान से जुड़े अधिकार साबित करने में आसानी होगी। इसके अलावा, संपत्ति का कानूनी रिकॉर्ड होने से लोगों के लिए संस्थागत ऋण हासिल करने की संभावना भी बढ़ेगी।
करीब 4 हजार गांवों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि पंजाब को लाल लकीर की समस्या से मुक्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार का लक्ष्य है कि दिसंबर तक गांवों और शहरों में लाल लकीर के तहत आने वाले मकानों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया पूरी की जाए।
इसके तहत करीब 4,000 गांवों में संपत्तियों का विधिवत पंजीकरण किए जाने की दिशा में काम चल रहा है। सरकार के इस कदम से लंबे समय से अपने घर के कानूनी मालिकाना हक का इंतजार कर रहे परिवारों को स्थायी पहचान और संपत्ति संबंधी अधिकार मिलने की उम्मीद है।
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