चंडीगढ़(Chandigarh) धीरे-धीरे फिल्म निर्माताओं के लिए पसंदीदा शूटिंग लोकेशन बनता जा रहा है। पिछले पांच वर्षों में केंद्र शासित प्रदेश में करीब 335 फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। फिल्मों की बढ़ती संख्या को देखते हुए चंडीगढ़ प्रशासन अब एक अलग फिल्म पॉलिसी तैयार कर रहा है। इसका मकसद शूटिंग की परमिशन लेने का पूरा प्रोसेस आसान बनाना और फिल्म मेकिंग के लिए बेहतर व्यवस्था तैयार करना है। नई नीति को सितंबर के अंत तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
चंडीगढ़ की सबसे बड़ी खासियत यहां कम दूरी में अलग-अलग तरह की लोकेशन का मिल जाना है। हरे-भरे सेक्टर, पेड़ों से घिरी सड़कें, खूबसूरत घर, पार्क और आधुनिक शहरी क्षेत्र फिल्मों को अलग लुक देते हैं। वहीं शहर के बाहरी हिस्सों में भीड़भाड़ वाले इलाके, पुराने मोहल्ले और गांव जैसा माहौल भी मिल जाता है। इसी वजह से फिल्म निर्माताओं को अलग-अलग दृश्यों के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती। ‘मैं वापस आऊंगा’, ‘धुरंधर’, ‘सैम बहादुर’, ‘शेरशाह’, ‘जर्सी’, ‘द डिप्लोमैट’ और ‘लाल सिंह चड्ढा’ जैसी फिल्मों की शूटिंग भी चंडीगढ़ में हो चुकी है।
प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश
फिल्म शूटिंग के दौरान ट्रैफिक, भीड़ और आम लोगों की सुविधा का ध्यान रखना प्रशासन के लिए जरूरी होता है। अलग-अलग जगहों के लिए पुलिस, नगर निगम, एस्टेट ऑफिस और अन्य विभागों से अनुमति लेनी पड़ सकती है।
इसी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए 2004 में फिल्म फैसिलिटेशन सेंटर शुरू किया गया था। 2022 से ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है और अब कई मामलों में तीन से पांच कार्यदिवस में अनुमति मिल सकती है।
शूटिंग से पर्यटन को भी बढ़ावा
नई फिल्म पॉलिसी के जरिए प्रशासन शूटिंग की अनुमति, लोकेशन और सुविधाओं को लेकर एक व्यवस्थित ढांचा तैयार करना चाहता है। इससे फिल्म निर्माताओं के लिए चंडीगढ़ में काम करना आसान होने के साथ शहर की पहचान और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।