उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्तियों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछली सरकारों पर तीखा हमला बोला है। मंगलवार को कृषि विभाग में 3,572 नवनियुक्त युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए CM योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया भ्रष्टाचार और अव्यवस्था से जुड़ी हुई थी। उन्होंने दावा किया कि उस समय विज्ञापन निकलने के बाद वसूली शुरू हो जाती थी, युवा लंबे समय तक परिणाम का इंतजार करते थे और अंत में मामला अदालत तक पहुंच जाता था।
विज्ञापन निकलता फिर होती थीवसूली
CM योगी ने कहा, “2017 के पहले की परिपाटी थी कि नियुक्ति का विज्ञापन निकलता था, फिर वसूली होती थी। नौजवान भटकता रहता था, परिणाम नहीं आता था और अंततः न्यायालय को स्टे लगाना पड़ता था।” उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में देरी का सबसे बड़ा नुकसान युवाओं को होता था। उनकी उम्र और समय दोनों निकल जाते थे। इसके बावजूद समाज में यह धारणा बनने लगती थी कि युवा नौकरी पाने के योग्य नहीं है। CM योगी ने कहा कि समस्या युवाओं में नहीं, बल्कि उस समय भर्ती आयोगों, बोर्डों और सरकारी व्यवस्था में बैठे भ्रष्ट लोगों में थी।
‘एक लाख युवाओं को अगले 6 महीने में नौकरी’
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सरकारी नियुक्तियों का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने प्रदेश के युवाओं को भरोसा दिलाते हुए कहा कि अगले छह महीनों में अलग-अलग चरणों में एक लाख नौजवानों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। उन्होंने दावा किया कि अब तक 9.30 लाख से अधिक युवाओं को बिना भेदभाव और पारदर्शी प्रक्रिया के सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। मंगलवार के कार्यक्रम में कृषि तकनीकी सहायक और मंडी सचिव समेत अन्य पदों पर चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपे गए।
2017 से पहले UP का जिक्र कर विपक्ष पर निशाना
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की स्थिति का जिक्र करते हुए विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस समय यूपी को बीमारू राज्य के तौर पर देखा जाता था। युवाओं के सामने रोजगार के लिए पलायन की मजबूरी थी। मुख्यमंत्री योगी ने आरोप लगाया कि उस दौर में कर्फ्यू, हिंसा, उपद्रव और भ्रष्टाचार प्रदेश की पहचान बन गए थे। किसानों, व्यापारियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने पिछली सरकारों को घेरा। उन्होंने कहा कि आज स्थिति बदल चुकी है और उत्तर प्रदेश के युवाओं को अपनी पहचान छिपाने या रोजगार के लिए मजबूरी में पलायन करने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, अब यूपी के युवाओं के लिए प्रदेश के भीतर और बाहर रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं।
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