चीन के बढ़ते निर्यात ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। घरेलू मांग कमजोर पड़ने के बाद चीनी कंपनियां विदेशी बाजारों में ज्यादा माल भेज रही हैं। अमेरिका का आरोप है कि चीन जरूरत से ज्यादा उत्पादन कर वैश्विक बाजार में कम कीमत वाले सामान की बाढ़ ला रहा है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन इस पर लगाम लगाने के लिए चीन से आने वाले सामान पर करीब 7.5 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है।मामले से परिचित लोगों के मुताबिक, शुल्क की अंतिम दर अभी तय नहीं हुई है। अमेरिकी प्रशासन ऐसी दर तय करना चाहता है, जिससे चीन के साथ चल रहा मौजूदा व्यापार समझौता प्रभावित न हो। सितंबर के अंत में ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात को देखते हुए भी अमेरिका सावधानी से कदम बढ़ा रहा है।
क्यों चीन के खिलाफ नया टैरिफ लगाने की तैयारी?
अमेरिका की मुख्य चिंता चीन की ओवरकैपेसिटी है। यानी चीन के कई उद्योग घरेलू जरूरत से कहीं ज्यादा उत्पादन कर रहे हैं और अतिरिक्त सामान को विदेशी बाजारों में खपाया जा रहा है। इससे अमेरिकी कंपनियों समेत दूसरे देशों के उत्पादकों पर कीमतों का दबाव बढ़ रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने मार्च में इसी मुद्दे को लेकर चीन और कुछ अन्य देशों की औद्योगिक क्षमता की जांच शुरू की थी। चीन के खिलाफ जांच अमेरिकी व्यापार कानून की धारा 301 के तहत की जा रही है। ऑटोमोबाइल, स्टील, सोलर पैनल और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में चीन की उत्पादन क्षमता को लेकर अमेरिका समेत कई देश पहले ही सवाल उठा चुके हैं। हालांकि, चीन लगातार ओवरकैपेसिटी के आरोपों को खारिज करता रहा है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा चीन का व्यापार
चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था में मांग की रफ्तार धीमी होने के बीच निर्यात पर निर्भरता बढ़ी है। इसका असर उसके व्यापार आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। पिछले साल चीन का व्यापार अधिशेष करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया। चीन के वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि इतने बड़े व्यापार अधिशेष को उसने कभी अपना लक्ष्य नहीं बनाया। लेकिन अमेरिका के लिए यह आंकड़ा चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि उसका मानना है कि चीनी सामान की बढ़ती वैश्विक हिस्सेदारी स्थानीय उद्योगों को नुकसान पहुंचा सकती है।
नया शुल्क पुराने टैरिफ के ऊपर होगा
प्रस्तावित 7.5 फीसदी शुल्क चीन पर पहले से लागू टैरिफ के अतिरिक्त होगा। अमेरिका पहले ही करीब 60 अर्थव्यवस्थाओं से आने वाले सामान पर 10 से 12.5 फीसदी तक शुल्क लगाने की घोषणा कर चुका है। अगर चीन पर नया शुल्क लागू होता है तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ सकता है। हालांकि, वॉशिंगटन की कोशिश फिलहाल ऐसा रास्ता निकालने की है जिससे व्यापार समझौता पूरी तरह पटरी से न उतरे।
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