पंचकूला साइबर क्राइम पुलिस की जांच में जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आ रहे हैं, ठगी का यह नेटवर्क और भी चौंकाने वाला होता जा रहा है। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने लोगों को कम समय में पैसा कई गुना करने, क्रिप्टो में भारी रिटर्न देने और दुबई में फ्लैट-प्लाट दिलाने का झांसा देकर करीब 8 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाई है। ठगी की इस काली कमाई से लग्जरी गाड़ियां और फार्महाउस खरीदने वाले इस रैकेट के शिकार कम पढ़े-लिखे लोगों के साथ-साथ कई शिक्षित और पेशेवर लोग भी बने हैं।
रेहड़ी चलाने वाले ‘नाना’ के पास मिलीं मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू
इस पूरे घोटाले में सबसे चर्चित नाम करनाल निवासी राजेश कुमार उर्फ ‘नाना’ का सामने आया है। कभी सड़क किनारे कढ़ी-चावल की रेहड़ी लगाने वाला राजेश इस जालसाजी के नेटवर्क में शामिल होकर नेटवर्क का ‘सीनियर प्रोजेक्ट हेड’ बन बैठा। उसने इस खेल में करीब 2 करोड़ रुपये कमाए और आलीशान फार्महाउस बना लिया। पुलिस ने राजेश की मर्सिडीज सी-क्लास के साथ-साथ गिरोह के सदस्यों की ऑडी क्यू5, ऑडी क्यू3 और बीएमडब्ल्यू जैसी कई लग्जरी गाड़ियां जब्त की हैं। पुलिस अब इन गाड़ियों को अपराध से अर्जित संपत्ति मानकर नीलामी की कानूनी प्रक्रिया में जुट गई है।
नकली ऐप पर दिखाया जाता था फर्जी मुनाफा
गिरोह के काम करने का तरीका बेहद शातिराना था। यह गिरोह ब्लूम ड्राइव, एलपीएनटी क्रिप्टोकरेंसी, सॉइल वर्स और मेचाई एफएक्स जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों को जोड़ता था। निवेशकों को मोबाइल ऐप की स्क्रीन पर लगातार बढ़ता हुआ बैलेंस दिखाया जाता था, जिससे उन्हें लगता था कि उनका पैसा वास्तव में मुनाफा कमा रहा है। जब लोग अपने पैसे निकालने की मांग करते, तो उनके पैसों को दूसरी योजनाओं या क्रिप्टोकरेंसी में ट्रांसफर करने का बहाना बनाकर टाल दिया जाता था।
ठेकेदार की शिकायत से खुला ठगी का राज
इस बड़े घोटाले का खुलासा पंचकूला के सरकारी ठेकेदार अशोक कुमार की शिकायत के बाद हुआ। अशोक ने शुरुआत में 8,500 रुपये लगाए और रिटर्न मिलने पर भरोसा करके 3.5 लाख रुपये का कर्ज लेकर निवेश कर दिया। धीरे-धीरे उनके रिश्तेदार और परिचित भी जुड़ते गए और देखते ही देखते उनसे तथा उनके संपर्क में आए लोगों से करीब 7 से 8 करोड़ रुपये ठग लिए गए। हरियाणा के यमुनानगर, कैथल, करनाल, अंबाला और कुरुक्षेत्र जिलों से इस गिरोह के खिलाफ दर्जनों शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
चार आरोपी गिरफ्तार, दुबई तक पहुंची जांच की आंच
पुलिस ने इस मामले में अब तक चार प्रमुख आरोपियों- राजेश कुमार, उदम सिंह, सुशील कुमार और संजीव कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। इनके पास से मिले कई डिजिटल उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। मामले की कड़ियां अब विदेशों से भी जुड़ती दिख रही हैं। पुलिस को शक है कि इस रैकेट की डोर दुबई में बैठे आकाओं के हाथ में थी। मामले में नामजद रविंदर बांगर और हैप्पी शेख के दुबई में होने की आशंका के चलते उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया गया है।
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