चेक बाउंस से जुड़े मामलों में अभिनेता राजपाल यादव(Rajpal Yadav) को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। बुधवार को उनकी याचिका पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई की। यह मामला मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े सात अलग-अलग चेक बाउंस मामलों का है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अभिनेता के मामले को लेकर सख्त रुख अपनाया। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने यहां तक कहा कि परिस्थितियों को देखते हुए राजपाल यादव की सजा बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
फिल्म में नुकसान का दिया हवाला
राजपाल यादव की ओर से अदालत में बताया गया कि उनकी फिल्म ‘अता पता लापता’ से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ था। अभिनेता ने कहा कि फिल्म में उनके करीब 17 करोड़ रुपये फंस गए। उन्होंने यह भी कहा कि वह अदालत के निर्देशों का पालन करने के लिए तैयार हैं और जब भी, जहां भी उन्हें बुलाया जाएगा, वह मौजूद रहेंगे।
अभिनेता के मुताबिक फिल्म का कुल बजट लगभग 22 करोड़ रुपये था, लेकिन इससे कोई कमाई नहीं हुई। यहां तक कि फिल्म सिनेमाघरों में ठीक से रिलीज भी नहीं हो सकी।
हाई कोर्ट ने सुनाई थी सजा
इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी माना था और प्रत्येक मामले में तीन महीने की सजा सुनाई थी। इसके बाद अभिनेता ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
पिछली सुनवाई में भी शीर्ष अदालत ने रकम जमा करने में देरी को लेकर नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि कई बार निर्देश दिए जाने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया।
शिकायतकर्ता को राहत देने पर जोर
सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने संकेत दिया कि अदालत अब तक शिकायतकर्ता को कुछ राशि वापस दिलाने की उम्मीद में राजपाल यादव की ओर से अपनाए गए तरीकों को नजरअंदाज करती रही है। अदालत ने यह भी कहा कि यदि शिकायतकर्ता को राहत देने की कोशिश न होती, तो अभिनेता की सजा के खिलाफ अपील को पहले ही खारिज किया जा सकता था।