France Student Protest: फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और स्कूलों के लिए ज्यादा फंडिंग की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब देशभर में फैल चुका है। छात्रों का आरोप है कि स्कूलों में बढ़ती संख्या के मुकाबले शिक्षक, कक्षाएं और जरूरी संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। जर्जर स्कूल भवन, भीड़भरी कक्षाएं और स्टाफ की कमी के खिलाफ कई शहरों में प्रदर्शन और स्कूलों की नाकेबंदी की गई है।
5,060 लोग गिरफ्तार
फ्रांस के न्याय मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक आंदोलन के दौरान 5,060 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और इनमें 87 प्रतिशत नाबालिग हैं। इसी अवधि में कम से कम 190 छात्रों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। कई जगह प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसके बाद आंसू गैस और दूसरे पुलिस नियंत्रण उपायों का इस्तेमाल किया गया।
15 साल के छात्र का हाथ उड़ा
सबसे गंभीर घटनाओं में से एक उत्तरी फ्रांस के लेंस शहर में हुई। 5 अक्टूबर को एक 15 वर्षीय छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया और उसका हाथ उड़ गया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार घटना पुलिस द्वारा इस्तेमाल की गई एक ग्रेनेड के दौरान हुई। मामले की परिस्थितियों की जांच की जा रही है और यह भी स्पष्ट किया जा रहा है कि ग्रेनेड छात्र के हाथ में कैसे पहुंचा।
14 साल के ईडन के जबड़े में फ्रैक्चर
इससे पहले 28 सितंबर को सेंट-ओएन-ल’ओमोन में 14 वर्षीय ईडन को आंसू गैस ग्रेनेड के प्रहार से गंभीर चोट लगी थी। उसके जबड़े में दो जगह फ्रैक्चर हुआ और उसे कई सर्जरी की जरूरत पड़ी। घटना की जांच के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को 6 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया और बाद में उस पर न्यायिक कार्रवाई शुरू की गई।
21 सितंबर को पेरिस से शुरू हुआ विरोध
छात्र आंदोलन की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के पास क्रेतेय के एक स्कूल से हुई थी। छात्रों ने शिक्षकों और स्टाफ की कमी को लेकर विरोध शुरू किया। इसके बाद स्कूलों की खराब स्थिति, भीड़भरी कक्षाओं, शिक्षकों की अनुपलब्धता और शिक्षा व्यवस्था में असमानता जैसे मुद्दे भी आंदोलन का हिस्सा बन गए। कुछ ही दिनों में विरोध कई शहरों के स्कूलों तक पहुंच गया।
सैकड़ों स्कूलों की नाकेबंदी
आंदोलन बढ़ने के साथ छात्रों ने सैकड़ों स्कूलों को बंद कराया और कई जगह स्कूलों के प्रवेश द्वारों पर नाकेबंदी की। विश्वविद्यालयों के छात्र और शिक्षकों के संगठन भी बाद में इस आंदोलन से जुड़े। छात्र संगठन यूनियन सिंडिकेल लिसेन ने देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया, जबकि शिक्षक संगठनों ने भी अपने सदस्यों से इसमें शामिल होने की अपील की।
लिले में प्रदर्शनकारी ने क्या कहा?
उत्तरी शहर लिले में प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “हमें उन्हें सुनना चाहिए.” यह मांग आंदोलन के उस पक्ष को सामने रखती है जिसमें छात्र सरकार से उनकी शिक्षा संबंधी समस्याओं को गंभीरता से सुनने और समाधान की मांग कर रहे हैं। आंदोलन में स्कूलों के लिए ज्यादा फंडिंग, पर्याप्त शिक्षक और बेहतर बुनियादी सुविधाओं की मांग प्रमुख है।
मंगलवार को बड़े प्रदर्शन
6 अक्टूबर को देशभर में आंदोलन का बड़ा चरण देखने को मिला। फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक पेरिस के बाहर मंगलवार सुबह करीब 86 हजार लोग प्रदर्शनों में शामिल हुए। छात्र संगठनों और यूनियनों ने इससे कहीं अधिक संख्या का दावा किया। प्रदर्शन में छात्र, शिक्षक, अभिभावक और ट्रेड यूनियन भी शामिल हुए।
पुलिस से झड़प और तोड़फोड़
कई जगह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ इलाकों में स्थिति बिगड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने कूड़ेदानों में आग लगाई और कुछ स्थानों पर संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। जवाब में पुलिस ने आंसू गैस और अन्य भीड़ नियंत्रण उपायों का इस्तेमाल किया। आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की हिंसा, दोनों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
छात्र आखिर चाहते क्या हैं?
छात्रों की मुख्य मांग शिक्षा व्यवस्था के लिए ज्यादा सरकारी फंडिंग, अधिक शिक्षक और बेहतर स्कूल सुविधाएं हैं। उनका कहना है कि बढ़ती छात्र संख्या के बीच कक्षाओं में भीड़ बढ़ रही है, शिक्षकों की कमी है और कई स्कूलों की इमारतें खराब हालत में हैं। आंदोलन में विश्वविद्यालय प्रवेश व्यवस्था Parcoursup को लेकर भी असमानता की शिकायतें सामने आई हैं।
सरकार के सामने बढ़ी चुनौती
छात्र आंदोलन के हिंसक घटनाओं तक पहुंचने और पुलिस कार्रवाई में नाबालिगों के घायल होने के मामलों ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। आंदोलन अब केवल स्कूलों की समस्याओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस कार्रवाई, शिक्षा में सरकारी निवेश और छात्रों की आवाज सुने जाने जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ गया है।
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