महाराष्ट्र के नागपुर स्थित सिम्बायोसिस लॉ यूनिवर्सिटी में एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर अहमर अफ़ाक पर एक छात्रा को कथित तौर पर आपत्तिजनक और अश्लील मैसेज भेजने के आरोप लगे हैं। परिजनों का दावा है कि इन संदेशों में धार्मिक रीति-रिवाजों को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। सोशल मीडिया पर यह मामला तूल पकड़ चुका है, जिसमें प्रोफेसर पर छात्राओं को धमकाने और अन्य गंभीर दबाव बनाने के आरोप भी चर्चा में हैं।
कॉलेज परिसर में हंगामा
मामले की जानकारी मिलने के बाद बुधवार को छात्रा के पिता कॉलेज पहुंचे और प्रोफेसर से इन आपत्तिजनक संदेशों को लेकर सवाल-जवाब किए। इस दौरान तीखी झड़प हुई और पिता द्वारा प्रोफेसर को थप्पड़ मारे जाने की बात भी सामने आई। हालांकि इस घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने यूनिवर्सिटी परिसर में खलबली मचा दी और मामला तेजी से तूल पकड़ता चला गया।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से है प्रोफेसर की पृष्ठभूमि
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपों के घेरे में आए प्रोफेसर अहमर अफ़ाक ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से शिक्षा प्राप्त की है और वह इससे पहले हैदराबाद के एक निजी कॉलेज में कार्यरत रह चुके हैं। वर्तमान में वह नागपुर के वाठोडा स्थित सिम्बायोसिस लॉ यूनिवर्सिटी में प्राध्यापक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि, उनकी पुरानी शैक्षणिक पृष्ठभूमि या नौकरी से इन आरोपों का सीधा संबंध साबित नहीं होता है, और मामले पर प्रोफेसर का आधिकारिक पक्ष आना अभी बाकी है।
विश्व हिंदू परिषद का प्रदर्शन और अल्टीमेटम
इस घटना के विरोध में शनिवार को विश्व हिंदू परिषद (VHP) और विभिन्न छात्र संगठनों ने कॉलेज के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कॉलेज प्रशासन से आरोपी प्रोफेसर को तत्काल निलंबित करने और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच प्रदर्शनकारियों ने बताया कि कॉलेज प्रशासन ने 15 दिनों के भीतर कठोर कदम उठाने का आश्वासन दिया है, हालांकि अभी तक निलंबन की पुष्टि न होने से लोगों में नाराजगी बनी हुई है।
पुलिस की कार्रवाई और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
फिलहाल इस पूरे प्रकरण को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज होने या प्रशासन की ओर से कोई बयान सामने आने की पुष्टि नहीं हुई है। चूंकि प्रोफेसर का पक्ष भी अभी तक उपलब्ध नहीं है, इसलिए विशेषज्ञ और अधिकारी सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच और आधिकारिक बयानों के सामने आने का इंतजार कर रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके।
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