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भारत से रिश्ते सुधारने की पहल! आज अजरबैजान जाएंगे जयशंकर, कूटनीतिक हलचल तेज

भारत और अजरबैजान के संबंधों में सुधार की नई संभावना दिखाई दे रही है। पाकिस्तान का समर्थन करने वाले अजरबैजान की ओर से भारत के साथ बातचीत और सहयोग बढ़ाने के संकेत मिल रहे हैं। इसी बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर(S. Jaishankar) 23 अक्टूबर यानी आज अजरबैजान की राजधानी बाकू की यात्रा करेंगे। करीब आठ साल बाद किसी भारतीय विदेश मंत्री का यह दौरा होगा। इस यात्रा को दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद आगे बढ़ाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव की मुलाकात हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच संपर्क जारी रहा। जयशंकर की यात्रा को इसी संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

पाकिस्तान के समर्थन से बिगड़े थे रिश्ते

पिछले कुछ वर्षों में अजरबैजान का झुकाव पाकिस्तान की ओर रहा है। वर्ष 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। उस दौरान अजरबैजान और तुर्किये ने पाकिस्तान का समर्थन किया था। अजरबैजान के विदेश मंत्रालय ने भारतीय सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते हुए पाकिस्तान की संप्रभुता का समर्थन किया था।

हालांकि, बदलते क्षेत्रीय और वैश्विक हालात के बीच अजरबैजान अब भारत के साथ व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने में रुचि दिखा रहा है। दक्षिण काकेशस और मध्य एशिया में भारत की बढ़ती सक्रियता भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

व्यापार और ऊर्जा सहयोग पर रहेगी नजर

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जयशंकर बाकू में अपने अजरबैजानी समकक्ष से मुलाकात करेंगे। बातचीत में व्यापार, ऊर्जा, परिवहन संपर्क और सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल होंगे।

भारत और अजरबैजान के बीच ऊर्जा क्षेत्र में पहले से सहयोग है। ओएनजीसी विदेश ने अजरबैजान के अजेरी-चिराग-गुनाशली तेल एवं गैस क्षेत्र और बाकू-तिबिलिसी-जेहान पाइपलाइन में निवेश किया है। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच व्यापार करीब 40 करोड़ डॉलर रहा, जिसमें कच्चे तेल का आयात प्रमुख था।

आगे क्या होगा?

हाल ही में भारत के नए राजदूत अभय कुमार ने अजरबैजान के राष्ट्रपति को अपना परिचय पत्र सौंपा था। अब जयशंकर की यात्रा से दोनों देशों के बीच संवाद और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, रिश्तों में वास्तविक सुधार किस स्तर तक होता है यह आगामी बातचीत और दोनों देशों के कदमों पर निर्भर करेगा।

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