भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में राफेल मरीन लड़ाकू विमानों के परीक्षण गोवा में किए जा रहे हैं। इन परीक्षणों का उद्देश्य विमानों में जरूरी बदलावों और उनकी परिचालन क्षमता का आकलन करना है, ताकि वे भारत के स्वदेशी विमानवाहक पोत INS विक्रांत से उड़ान भरने और उस पर उतरने में सक्षम हो सकें। भारत ने नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन विमानों की खरीद का समझौता किया है। इनकी डिलीवरी 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद जताई गई है। राफेल मरीन को विमानवाहक पोतों से संचालन के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है। इसके भारतीय नौसेना में शामिल होने से समुद्र में हवाई सुरक्षा, दुश्मन के जहाजों पर हमले और लंबी दूरी तक सैन्य अभियान चलाने की क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है।
INS विक्रांत से संचालन की तैयारी
गोवा में चल रहे परीक्षणों के दौरान राफेल मरीन विमान की उन विशेषताओं और बदलावों का आकलन किया जा रहा है, जो INS विक्रांत से संचालन के लिए जरूरी हैं। विमानवाहक पोत से उड़ान भरने और उतरने के लिए लड़ाकू विमानों में सामान्य लड़ाकू विमानों की तुलना में अधिक मजबूत लैंडिंग गियर और विशेष प्रणालियों की जरूरत होती है। INS विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत है। इसे 2 सितंबर 2022 को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। यह लगभग 30 विमानों के संचालन में सक्षम है। इसके एयर विंग में मिग-29के, मिग-29केयूबी, कामोव-31, एमएच-60आर, चेतक और एएलएच ध्रुव जैसे विमान और हेलीकॉप्टर शामिल हैं।
राफेल मरीन के शामिल होने से विमानवाहक पोत की परिचालन क्षमताओं में विस्तार होगा और नौसेना को आधुनिक लड़ाकू विमानों का अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।
रडार, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा
राफेल मरीन को हवा से हवा, हवा से जमीन और एंटी-शिप हमलों के लिए डिजाइन किया गया है। इसका अधिकतम टेक-ऑफ वजन करीब 24.5 टन है। इसमें मजबूत लैंडिंग गियर और अरेस्टर हुक जैसी सुविधाएं हैं, जो विमानवाहक पोत पर उतरने के दौरान जरूरी होती हैं। विमान दो सैफ्रान M88 टर्बोफैन इंजनों से संचालित होता है और इसकी अधिकतम गति लगभग मैक 1.8 बताई जाती है। इसमें RBE2 AESA रडार और SPECTRA इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर प्रणाली लगी है। ये प्रणालियां दुश्मन के विमानों और रडार से जुड़े खतरों का पता लगाने तथा उनसे बचाव में मदद करती हैं।
हथियारों के लिहाज से राफेल मरीन मेटेओर और MICA हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के अलावा SCALP क्रूज मिसाइल और AM39 एक्सोसेट एंटी-शिप मिसाइल ले जाने में सक्षम है। इससे समुद्र और जमीन, दोनों मोर्चों पर इसकी उपयोगिता बढ़ती है।
फ्रांस के साथ 63 हजार करोड़ रुपये का रक्षा समझौता
भारत ने 28 अप्रैल 2025 को फ्रांस के साथ नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमान खरीदने का करीब 63,000 करोड़ रुपये का समझौता किया था। सौदे में 22 सिंगल-सीटर और चार ट्विन-सीटर विमान शामिल हैं। समझौते के तहत विमानों की आपूर्ति 2028 से 2032 के बीच किए जाने की योजना है। शुरुआती डिलीवरी 2028 के अंत या 2029 की शुरुआत में होने की उम्मीद है। गोवा में जारी परीक्षण इस विमान को भारतीय नौसेना की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा हैं। राफेल मरीन के शामिल होने से भारत की समुद्री युद्ध क्षमता और विमानवाहक पोत आधारित अभियानों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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