HomeBreaking News'रिजीम चेंज न हुआ, न होगा', दशहरा कार्यक्रम में फ्रांस से नेपाल...

‘रिजीम चेंज न हुआ, न होगा’, दशहरा कार्यक्रम में फ्रांस से नेपाल तक पर बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत, कहा- जब भी बंटे, कमजोर हुए

Mohan Bhagwat Vijayadashami Speech: नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजयादशमी समारोह को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने फ्रांस समेत कई देशों में हुए आंदोलनों और राजनीतिक बदलावों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘एक पश्चिम से आंधी चली है जो हर प्रकार की भद्रता, व्यवस्था, संस्कार का विरोध करती है और उसे नष्ट करना चाहती है।’ उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, नेपाल और बांग्लादेश के घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि यह मानना गलत है कि केवल ‘रिजीम चेंज’ से परिस्थितियां बदल जाएंगी। उनके मुताबिक ऐसा पहले भी नहीं हुआ और आगे भी नहीं होगा।

100 साल से भारत की पहचान मजबूत करने का दावा

भागवत ने कहा कि RSS पिछले 100 वर्षों से भारत को उसकी पहचान, संस्कृति और परंपराओं के आधार पर संगठित और मजबूत बनाने के लिए काम कर रहा है। संघ के शताब्दी वर्ष में जिन पांच प्रमुख बदलावों पर जोर दिया जा रहा है, उनमें अपनी पहचान का बोध और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना भी शामिल है।

राज नारायण बसु और स्वदेशी मेलों का किया जिक्र

संघ प्रमुख ने बंगाल के राज नारायण बसु को भी याद किया। उन्होंने कहा कि उनके जन्म के 200 वर्ष पूरे हो रहे हैं। समाज को स्वदेशी मेलों के माध्यम से अपनी संस्कृति और पहचान के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से राज नारायण बसु ने हिंदू मेले की शुरुआत की थी। भागवत ने विदेशी आक्रमणों के दौर में समाज के सामने मौजूद चुनौतियों का भी उल्लेख किया।

संत रविदास जी के योगदान को किया याद

विजयादशमी समारोह में मोहन भागवत ने संत रविदास जी के योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब देश विदेशी आक्रमणकारियों के हमलों और अत्याचारों से गुजर रहा था, तब समाज में डर का माहौल था। ऐसे समय में संत रविदास जी ने स्वधर्म के प्रति निष्ठा, सामाजिक समरसता और भक्ति का संदेश दिया। भागवत के अनुसार उन्होंने अपने जीवन से उदाहरण पेश कर लोगों को सांत्वना दी और उनका मनोबल बढ़ाया।

भारत की विविधता को एकता की ताकत बताया

भागवत ने कहा कि भारत अलग-अलग पंथ, प्रांत, जाति, भाषा, खानपान और रीति-रिवाजों वाला विविधता से भरा देश है, लेकिन भारत माता का स्थान सर्वोच्च है। उन्होंने कहा कि देश पहले भी एक होकर आगे बढ़ा है और भविष्य में भी एकता के साथ आगे बढ़ना होगा। उनके मुताबिक विविधता स्वाभाविक है, लेकिन संपूर्ण अस्तित्व की एकता का सत्य अचल, अटल और शाश्वत है।

नशे की समस्या पर अभिभावकों को दी जिम्मेदारी

संघ प्रमुख ने बढ़ती नशीली दवाओं की समस्या को भी गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी नशे की ओर बढ़ रही है और अभिभावकों को आने वाली पीढ़ी को इसके नुकसान के बारे में समझाना चाहिए। उन्होंने समाज और परिवार की भूमिका पर जोर देते हुए नई पीढ़ी को सही दिशा देने की बात कही।

‘सही और गलत’ का फर्क समझे नई पीढ़ी

मोहन भागवत ने कहा कि नई पीढ़ी सीखने के लिए उत्सुक रहती है और नई चीजें उसे आकर्षित करती हैं, लेकिन उसके लिए सही और गलत के बीच अंतर समझना जरूरी है। उन्होंने ओटीटी मंचों और दूसरे माध्यमों पर नियम व अनुशासन को लेकर शासन से संवाद की जरूरत का भी जिक्र किया। उनके अनुसार समझ की कमी से व्यक्तिगत, पारिवारिक और सामाजिक जीवन में कई तरह के दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं।

आंदोलन के उद्देश्य को लेकर भी दी चेतावनी

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि समाज और देश को चलाना सभी की जिम्मेदारी है। अगर किसी आंदोलन के पीछे अपनेपन की प्रेरणा है तो उसका उद्देश्य सकारात्मक हो सकता है, लेकिन यदि आंदोलन किसी व्यक्ति, समूह या विचार के प्रति विरोध बढ़ाने का माध्यम बन जाए तो वह राजनीति का साधन बन जाता है। उन्होंने कहा कि भारत को कमजोर करने वाली शक्तियां ऐसे आंदोलनों का इस्तेमाल कर सकती हैं।

हिंदू भाव को बताया भारत की एकता का आधार

मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदू भाव को जगाकर पूरे समाज को संगठित और बलशाली बनाने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जीवन से विश्व जीवन तक धारणा, प्रतिष्ठा और सुरक्षा बिना सामर्थ्य के संभव नहीं है। उन्होंने भारत के साथ संबंध को हृदय से जुड़ा और बिना शर्त बताया तथा ”तेरा वैभव अमर रहे मां, हम दिन चार रहें न रहें” का जिक्र किया।

आध्यात्मिकता और मानवता को बताया सनातन दृष्टि

संघ प्रमुख ने कहा कि आध्यात्मिकता, मानवता और विश्वबंधुत्व सनातन दृष्टि के प्रमुख लक्षण हैं। उनके मुताबिक ज्ञान के प्रकाश में रत भारत और भारतीयता की अवधारणा इसी भाव से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व को जोड़ने और जोड़ने की इच्छा रखने वाले हिंदू भाव का स्मरण और पोषण भारत की प्रगति व एकता के लिए आवश्यक है।

‘हिंदू दृष्टि’ को पूजा पद्धति से अलग बताया

भागवत ने कहा कि हिंदू भाव और हिंदू स्वभाव भारत की राष्ट्रीय चेतना से जुड़े हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी विशेष पूजा पद्धति, खानपान, रहन-सहन, सामाजिक या राजनीतिक विचारधारा, जाति, भाषा या प्रांत तक सीमित नहीं है।

नेपाल की त्रासदी से संतुलित विकास का संदेश

मोहन भागवत ने नेपाल में हुई भयंकर त्रासदी का भी जिक्र किया, जिसमें हजारों लोगों की जान गई। उन्होंने कहा कि इसके पीछे कहीं न कहीं पूरे हिमालय क्षेत्र में हुए एकांगी विकास का प्रभाव भी है। उन्होंने भारत, तिब्बत, भूटान और चीन से जुड़े हिमालयी क्षेत्र का जिक्र करते हुए संतुलित और समग्र विकास की जरूरत बताई।

तकनीक को साधन बताया

मोहन भागवत ने विज्ञान और तकनीक की प्रगति को मानव जीवन को भौतिक रूप से सुखी बनाने और ज्ञान व तर्क के आधार पर व्यवहार को बेहतर करने वाला बताया। हालांकि उन्होंने कहा कि तकनीक केवल एक साधन है। उनके अनुसार केवल उपभोगवादी या जड़वादी दृष्टिकोण से विकास किया गया तो सुविधाओं के साथ उससे बड़ी हानि भी उठानी पड़ सकती है।

शस्त्र पूजन से पहले हेडगेवार को दी श्रद्धांजलि

विजयादशमी समारोह से पहले मोहन भागवत ने नागपुर स्थित स्मृति मंदिर में संघ संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद शस्त्र पूजन कार्यक्रम हुआ। दशहरे के अवसर पर आरएसएस देशभर में पथ संचलन भी आयोजित करता है। संघ की स्थापना वर्ष 1925 में नागपुर में दशहरे के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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