प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में देशवासियों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने, पारंपरिक कृषि पद्धतियों को अपनाने, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता जैसे मुद्दों पर बात की। प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना के चलते भारतीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहचान मिल रही है। उन्होंने स्थानीय कारीगरों और किसानों के प्रयासों को देश की ताकत बताया।
पीएम मोदी ने कार्यक्रम के 12 साल के सफर का जिक्र करते हुए इसे आम लोगों की मेहनत, साहस और सेवा भावना को समझने का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि उनके लिए ‘मन की बात’ किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है, क्योंकि इसके जरिए उन्हें देशवासियों के योगदान को करीब से जानने का अवसर मिलता है।
पंजाब में प्राकृतिक कपास की खेती को मिल रहा बढ़ावा
प्रधानमंत्री ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए चल रही ‘नव-त्रिन्जन’ पहल का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ‘खेती विरासत मिशन’ नाम की संस्था जैविक और पारंपरिक कृषि पद्धतियों को फिर से लोकप्रिय बनाने की दिशा में काम कर रही है।इस पहल के तहत बिना रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल के जैविक कपास उगाने पर जोर दिया जा रहा है। यहां प्राकृतिक रंगों वाली कपास की खेती भी की जाती है, जिससे तैयार धागे और कपड़ों को रंगने के लिए अलग से रसायनों की जरूरत कम हो सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे प्रयास पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने ‘वोकल फॉर लोकल’ का जिक्र करते हुए बिहार के मखाने और कर्नाटक की अरहर दाल जैसे उत्पादों की बढ़ती पहुंच की भी चर्चा की। पीएम मोदी ने लोगों से स्थानीय कारीगरों के उत्पाद खरीदने की अपील की, ताकि पारंपरिक हुनर को प्रोत्साहन मिल सके।
आदिवासी उत्पादों की पैकेजिंग को जापान में सम्मान
पीएम मोदी ने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों के उत्पादों और उनकी आकर्षक पैकेजिंग की सराहना की। उन्होंने बताया कि ‘शबरी नेचुरल्स’ के माध्यम से शहद, महुआ, चीड़ और बांस से बने उत्पाद बाजार तक पहुंचाए जा रहे हैं। इन उत्पादों की पैकेजिंग में आदिवासी कला और संस्कृति की झलक दिखाई देती है। प्रधानमंत्री के मुताबिक, इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिज़ाइन अवार्ड’ मिला है। उन्होंने इसे स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता और सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच तक पहुंचाने का उदाहरण बताया।
त्योहारी मौसम का उल्लेख करते हुए उन्होंने दीवाली और छठ से पहले स्वच्छता बनाए रखने की अपील भी की। पीएम मोदी ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों और आसपास के क्षेत्रों की सफाई में लोगों की छोटी-छोटी कोशिशें भी बड़ा बदलाव ला सकती हैं।
हेवल नदी और सूखते जलस्रोतों को बचाने की पहल
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में हेवल नदी को फिर से जीवंत करने के लिए किए गए सामूहिक प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि नदी का जलस्तर घटने और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत सूखने की समस्या के बाद स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर संरक्षण अभियान शुरू किया। इस अभियान में बारिश के पानी को संचित करने, भूजल स्तर बढ़ाने और बड़े पैमाने पर पौधे लगाने जैसे उपाय अपनाए गए। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन प्रयासों से हेवल नदी की स्थिति में सुधार हुआ और कई प्राकृतिक जलस्रोत भी दोबारा बहाल हुए। पीएम मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ की शुरुआत 12 साल पहले विजयादशमी के अवसर पर हुई थी। तब से यह कार्यक्रम लगातार जारी है। उन्होंने देशवासियों को इस यात्रा का सहयात्री और मार्गदर्शक बताते हुए उनके परिश्रम, संकल्प और सेवा भावना को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताया।
Read More
बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान का खतरा, 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट से टकराने का अनुमान

