PM Modi Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 25 अक्टूबर को ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में देश के उन अनगिनत लोगों के योगदान को याद किया, जो समाज और राष्ट्र के लिए समर्पित होकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग समाज और देश के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं, वे अपने आप में एक तीर्थ के समान हैं। प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ को ऐसे लोगों के प्रयासों को करीब से जानने और उनके योगदान को नमन करने की तीर्थयात्रा बताया।
12 साल पहले विजयादशमी पर शुरू हुआ सफर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ‘मन की बात’ की 12 साल की यात्रा का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ”आज से 12 वर्ष पहले विजयादशमी के पावन अवसर पर हमने ‘मन की बात’ की शुरुआत की थी। तब से अब तक हमारी ये यात्रा निरंतर जारी है. इस यात्रा के सहयात्री भी आप हैं और मार्गदर्शक भी आप ही हैं।”
सामान्य लोगों के परिश्रम को मंच
पीएम मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ उनके लिए देश के सामान्य नागरिकों की मेहनत, साहस, प्रतिबद्धता, समर्पण और सेवा भावना को सम्मान देने का अवसर रहा है। उन्होंने कहा, ”मेरे लिए ‘मन की बात’ देश के सामान्य मानवी के परिश्रम, उसके पराक्रम, उसकी प्रतिबद्धता, उसके समर्पण और सेवा-भाव का गौरवगान करने का एक शुभ अवसर रहा है हमारे देश में सदियों से तीर्थ यात्रा की परंपरा रही है, मेरे लिए ‘मन की बात’ भी देश के लोगों के प्रयासों को करीब से जानने की और उनके योगदान को नमन करने की एक तीर्थ यात्रा से कम नहीं है।”
देश के कोने-कोने से सामने आईं प्रेरक कहानियां
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के हर हिस्से से ऐसे अनेक लोग सामने आए हैं, जिनके असाधारण कार्यों पर सामान्य तौर पर समाज का ध्यान नहीं जाता। ‘मन की बात’ के माध्यम से ऐसी अनगिनत प्रेरक कहानियों को देशवासियों तक पहुंचाने का काम हुआ है। उनके मुताबिक, इन कहानियों ने समाज में सकारात्मक प्रयासों और सेवा भावना को सामने लाने का अवसर दिया है।
‘लोकशक्ति की आराधना’ बताया कार्यक्रम
पीएम मोदी ने कहा कि वह ‘मन की बात’ के जरिए एक तरह से देश की लोकशक्ति की आराधना करते हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्हें देश के हर परिवार से जुड़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने बताया कि उन्हें सैकड़ों ऐसे संदेश मिलते हैं, जिनमें लोग कहते हैं कि ‘मन की बात’ सुनते हुए उन्हें ऐसा महसूस होता है जैसे प्रधानमंत्री उनके बीच, उनके परिवार में बैठकर परिवार के सदस्य की तरह उनसे संवाद कर रहे हों।
श्रोताओं का स्नेह बताया अमूल्य पूंजी
प्रधानमंत्री ने श्रोताओं से मिलने वाले इस आत्मीय जुड़ाव और स्नेह को अपनी अमूल्य पूंजी बताया। उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ की यात्रा में देश के लोग केवल श्रोता नहीं रहे, बल्कि इस सफर के सहयात्री और मार्गदर्शक भी बने हैं।
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