भारत और न्यूजीलैंड के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आज से औपचारिक रूप से लागू हो गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि नवरात्रि के नौवें दिन और विजयादशमी (दशहरा) के शुभ अवसर पर इस समझौते का प्रभावी होना दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी के लिए बेहद शुभ संकेत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समझौते की असली सफलता इस बात से तय होगी कि यह भारत और न्यूजीलैंड के लोगों के जीवन में क्या सकारात्मक बदलाव लाता है और रोजगार के कितने नए अवसर पैदा करता है।
20 अरब डॉलर का भारी निवेश और भारतीय निर्यात को बढ़ावा
इस ऐतिहासिक व्यापार सौदे के तहत भारत में 20 अरब डॉलर (लगभग 1.6 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम विदेशी निवेश आने की उम्मीद है। इससे देश के विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर), कृषि और नवाचार के क्षेत्रों में नए दरवाजे खुलेंगे, जिससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा, न्यूजीलैंड के बाजार में भारतीय उत्पादों को 100% टैक्स फ्री पहुंच मिलेगी, जिसका सीधा फायदा एमएसएमई, स्थानीय कारीगरों, किसानों और महिला उद्यमियों को मिलेगा। भारत से फल, सब्जियां, कॉफी, मसाले, अनाज और प्रोसेस्ड फूड जैसी वस्तुओं का निर्यात बढ़ेगा।
आयुष प्रणाली को वैश्विक पहचान और छात्रों को 4 साल का वर्क वीजा
यह मुक्त व्यापार समझौता कई मायनों में अभूतपूर्व है क्योंकि इसमें पहली बार कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। न्यूजीलैंड ने भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और ‘आयुष’ (AYUSH) प्रणाली को अपने देश में सेवा पहुंच प्रदान की है, जिससे भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान मिलेगी। इसके अतिरिक्त, भारतीय छात्रों की सहूलियत के लिए एक विशेष मार्ग तैयार किया गया है, जिसके तहत पढ़ाई पूरी करने के बाद भारतीय छात्र न्यूजीलैंड में चार साल तक काम कर सकेंगे। इससे युवाओं को व्यावहारिक अनुभव मिलेगा और वे न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान दे सकेंगे।
आर्थिक रिश्तों का नया और मजबूत अध्याय
पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि एक सफल एफटीए वही होता है जो संतुलित, पारस्परिक और दोनों पक्षों के लिए समान रूप से फायदेमंद हो। भारत और न्यूजीलैंड ने पूर्व में द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत और महत्वाकांक्षी बनाने का जो दृष्टिकोण रखा था, वह अब ठोस अवसरों में तब्दील हो चुका है। हमारे श्रमिक, किसान और कारोबारी नए विचारों और सेवाओं के साथ व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह समझौता दोनों देशों के रिश्तों के इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।
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