डॉक्टरों और अस्पतालों के प्रचार-प्रसार को लेकर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने नई गाइडलाइन जारी की है। इसके दायरे में पारंपरिक विज्ञापनों के साथ सोशल मीडिया, वेबसाइट, पॉडकास्ट, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग और AI से तैयार प्रचार सामग्री भी शामिल है। आयोग का कहना है कि नियमों का उद्देश्य मरीजों को भ्रामक दावों से बचाना और चिकित्सा पेशे की गरिमा बनाए रखना है।
‘बेस्ट’ और ‘गारंटीड इलाज’ जैसे दावों पर रोक
नई गाइडलाइन के तहत डॉक्टर या अस्पताल बिना स्वतंत्र और पारदर्शी प्रमाण के खुद को ‘बेस्ट’, ‘नंबर-1’, ‘लीडिंग’, ‘मोस्ट ट्रस्टेड’, ‘टॉप’ या ‘नंबर वन स्पेशलिस्ट’ बताकर प्रचार नहीं कर सकेंगे। इसी तरह मरीजों को आकर्षित करने के लिए ‘गारंटीड इलाज’ जैसे दावे भी प्रतिबंधित होंगे। इलाज की सफलता दर या इलाज करा चुके मरीजों की संख्या को इस तरह प्रचारित करने की अनुमति नहीं होगी, जिससे चिकित्सा सेवा का व्यावसायिक विज्ञापन नजर आए। हालांकि अस्पताल अपनी वेबसाइट पर नाम, संपर्क, विभाग, उपलब्ध जांच, आपातकालीन सेवाएं, मान्यता, सुविधाएं और शुल्क जैसी तथ्यात्मक जानकारी दे सकेंगे। डॉक्टरों की सूची में उनकी योग्यता, विशेषज्ञता, रजिस्ट्रेशन और उपलब्धता जैसी जानकारी भी दी जा सकती है।
सोशल मीडिया से लेकर AI तक नियम लागू
NMC ने विज्ञापन की परिभाषा को डिजिटल माध्यमों तक विस्तार दिया है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, ब्लॉग, वेबसाइट, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, पॉडकास्ट और इन्फ्लुएंसर के जरिए किया जाने वाला प्रचार भी इन नियमों के दायरे में आएगा। मरीज की तस्वीर, वीडियो, मेडिकल रिकॉर्ड, क्लिनिकल फोटो या प्रशंसापत्र के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। मरीज की पहचान से जुड़ी जानकारी का व्यावसायिक प्रचार में इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
AI से तैयार प्रचार सामग्री को लेकर भी आयोग ने स्पष्ट नियम बनाए हैं। AI की मदद से मरीज की तस्वीर, आवाज, प्रशंसापत्र या इलाज के परिणाम को बदलकर पेश करना प्रतिबंधित होगा। AI से तैयार प्रचार सामग्री में इसकी जानकारी स्पष्ट करनी होगी। व्यावसायिक लाभ के लिए AI आधारित भ्रामक प्रचार अभियान की अनुमति नहीं होगी।
डिस्काउंट और रेफरल से मरीज जुटाने पर भी रोक
डॉक्टर और अस्पताल मरीजों को आकर्षित करने के लिए डिस्काउंट, सीमित अवधि के ऑफर, कूपन, उपहार, कैशबैक, रेफरल लाभ या मुफ्त प्रक्रिया जैसे प्रलोभन नहीं दे सकेंगे। मरीजों में डर पैदा करके किसी जांच या इलाज की मांग बढ़ाने वाला प्रचार भी प्रतिबंधित रहेगा। किसी तीसरे पक्ष या इन्फ्लुएंसर को मरीज लाने के बदले भुगतान करना भी नियमों के खिलाफ होगा। हालांकि डॉक्टर जनस्वास्थ्य और स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों, अकादमिक चर्चाओं और बीमारी से संबंधित शैक्षणिक सामग्री में हिस्सा ले सकेंगे। टीवी, रेडियो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर बीमारी और जनस्वास्थ्य के मुद्दों पर अपने नाम और पद के साथ जानकारी देने की अनुमति होगी, लेकिन इसका इस्तेमाल अपने क्लिनिक या नियोक्ता संस्थान के व्यावसायिक प्रचार के लिए नहीं किया जा सकेगा। नियमों के उल्लंघन पर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इसमें तय अवधि के लिए रजिस्टर से नाम हटाने जैसी कार्रवाई और जहां कानून अनुमति देता है वहां आर्थिक दंड शामिल हो सकता है। हालांकि कार्रवाई से पहले संबंधित डॉक्टर को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का अवसर देना जरूरी होगा।
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