अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने के निवेशकों के लिए यह हफ्ता सुस्ती भरा रहा, जहां सोने की कीमतों में हफ्ते के आधार पर 2 प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड का भाव बिना किसी बड़े बदलाव के करीब 4,184 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करता हुआ नजर आया, लेकिन हफ्ते का कुल प्रदर्शन दबाव में ही रहा। अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मजबूती और बॉन्ड यील्ड में आई तेजी ने सोने के बाजार की चाल को काफी हद तक धीमा कर दिया है, क्योंकि डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों के निवेशकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से सोना खरीदना काफी महंगा साबित हो रहा है।
2002 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची बॉन्ड यील्ड
सोने की कीमतों में गिरावट की एक सबसे प्रमुख वजह अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में आया जबरदस्त उछाल है। 10 साल और 30 साल की अवधि वाले अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड गुरुवार को साल 2002 के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिससे वित्तीय बाजारों में नई हलचल देखने को मिली है। चूंकि सोना निवेशकों को कोई नियमित ब्याज या आय प्रदान नहीं करता है, इसलिए बॉन्ड से मिलने वाले आकर्षक और सुरक्षित रिटर्न के कारण निवेशकों का रुझान सोने की तरफ से हटकर बॉन्ड मार्केट की ओर स्थानांतरित होने लगा है, जो सोने की मांग को सीधा नुकसान पहुंचा रहा है।
अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से तय होगी भविष्य की चाल
अब अंतरराष्ट्रीय बाजार की नजरें अमेरिका के आने वाले नॉनफार्म पेरोल यानी रोजगार आंकड़ों पर टिकी हुई हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत का सही हाल बयां करेंगे। यदि अमेरिका में रोजगार के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा मजबूत आते हैं, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में आगे भी बढ़ोतरी करने या उन्हें ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की मजबूत वजह मिल जाएगी। यदि ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव देखा जा सकता है, जबकि कमजोर आंकड़ों की स्थिति में ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद जगेगी, जिससे सोने को कुछ राहत मिल सकती है।
महंगाई के आंकड़ों और दिसंबर की बैठक से बंधी उम्मीदें
महंगाई के मोर्चे पर आए हालिया आंकड़ों ने केंद्रीय बैंक के फैसलों को लेकर बाजार की उम्मीदों को थोड़ा बदला है, क्योंकि अगस्त में अमेरिका की महंगाई दर अनुमान से कम गति से बढ़ी थी। इस आंकड़े ने फिलहाल ब्याज दरें तुरंत बढ़ने के डर को कुछ हद तक शांत किया है और चालू महीने में दरें बढ़ने की संभावना काफी कम मानी जा रही है, हालांकि दिसंबर की फेड बैठक में बढ़ोतरी की आशंका अभी भी बरकरार है। फेडरल रिजर्व के शीर्ष अधिकारियों ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि वे ब्याज दरों पर कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले रोजगार और महंगाई से जुड़े नए आंकड़ों का गहन अध्ययन करेंगे।
मध्य पूर्व के तनाव से मिल सकता है सोने को सहारा
आने वाले दिनों में सोने की चाल मुख्य रूप से दो विपरीत दिशाओं वाले कारकों पर निर्भर करेगी, जिसमें एक तरफ अमेरिकी ब्याज दरों की राह है तो दूसरी तरफ मध्य पूर्व का बढ़ता तनाव है। एक तरफ जहां अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ऊंची ब्याज दरें सोने पर लगातार दबाव बनाए रख सकती हैं, वहीं दूसरी तरफ मध्य पूर्व में गहराता भू-राजनीतिक संकट सोने के लिए एक रक्षात्मक ढाल बन सकता है। संकट और अनिश्चितता के दौर में दुनिया भर के निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प मानते हैं, जिससे गिरावट के बीच भी सोने की मांग को निचले स्तरों पर सहारा मिल सकता है।
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