अगर आपकी 10-15 साल पुरानी पेट्रोल या डीजल गाड़ी पर स्क्रैप नीति की तलवार लटक रही है और नई इलेक्ट्रिक कार खरीदना बजट से बाहर है, तो इसे कबाड़ में बेचने की जरूरत नहीं है। कंपनियां पुरानी गाड़ियों को इलेक्ट्रिक अवतार में बदलकर फिर से सड़क पर दौड़ने के योग्य बना रही हैं। कंपनी के अनुसार, करीब 2.25 लाख रुपये के शुरुआती खर्च में आपकी पुरानी कार में से इंजन हटाकर इलेक्ट्रिक मोटर और बैटरी पैक फिट कर दिया जाता है, जिससे नई कार खरीदे बिना ही आपका काम आसान हो जाता है।
किन गाड़ियों में संभव है कन्वर्जन
हर कार को इलेक्ट्रिक में बदलना व्यावहारिक नहीं होता, लेकिन 1,000 किलोग्राम तक के वजन वाली छोटी हैचबैक गाड़ियों के लिए यह तकनीक बेहद कारगर है। साल 2009 तक की मारुति 800, ऑल्टो, स्विफ्ट, ओमनी, वैगनआर और हुंडई सैंट्रो या i10 जैसे मॉडल्स को आसानी से ईवी में बदला जा सकता है। बेसिक कन्वर्जन किट में 5 किलोवाट की मोटर, 7.2 किलोवाट-घंटे की बैटरी और मोटर कंट्रोलर सहित कुल 16 मुख्य उपकरण शामिल होते हैं। इसे अपने वर्कशॉप पर लगवाने के लिए नॉन-एसी मॉडल पर 7,500 रुपये और एसी मॉडल पर 12,500 रुपये का फिटिंग चार्ज अलग से लगता है।
RTO की मंजूरी और कानूनी प्रक्रिया
किसी भी वाहन में ईंधन प्रणाली बदलना केवल मोटर लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए रजिस्टर्ड आरटीओ से तकनीकी मंजूरी लेना अनिवार्य है। ग्राहक को स्वयं आरटीओ से फॉर्म 28A जमा कर ईंधन परिवर्तन की अनुमति लेनी होती है, जिस पर ग्रीन टैक्स (3-4%), सेस टैक्स और आरसी रिन्यूअल फीस शामिल होती है। छोटी हैचबैक के लिए यह कागजी कार्रवाई लगभग 24,000 से 25,000 रुपये के अतिरिक्त खर्च में पूरी होती है, जो नई कार के आरटीओ शुल्क का करीब 60 से 70 प्रतिशत है।
रेंज, चार्जिंग और वारंटी का गणित
इलेक्ट्रिक में तब्दील होने के बाद यह कार रोजाना के शहर के सफर के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन जाती है। 7.2 kWh क्षमता वाला बेसिक बैटरी पैक एक बार फुल चार्ज होने पर लगभग 120 किलोमीटर की ड्राइविंग रेंज देता है। घर के साधारण 16 एम्पीयर पावर सॉकेट से इसे 4 से 7 घंटे में पूरी तरह चार्ज किया जा सकता है। कंपनी वर्कशॉप पर फिटिंग कराने पर सर्विस वारंटी देती है, जिसमें कंपोनेंट का खर्च ग्राहक को देना होता है जबकि लेबर चार्ज कंपनी उठाती है।
बाजार में अन्य विकल्प और सही फैसला
देश में श्रीआन इलेक्ट्रिक के अलावा ई-ट्रियो, लूप मोटो और नॉर्थवे मोटरस्पोर्ट जैसी कई अन्य कंपनियां भी 3 लाख से 14 लाख रुपये के बजट में प्रीमियम ईवी कन्वर्जन की सुविधा देती हैं। हालांकि, पुरानी गाड़ी को कबाड़ में भेजने के बजाय इलेक्ट्रिक बनाने का फैसला लेते समय शुरुआती खर्च के साथ-साथ बैटरी की उम्र, वारंटी और आरटीओ की मंजूरी जैसे सभी व्यावहारिक पहलुओं का आंकलन करना जरूरी है।
READ MORE: ग्रेटर नोएडा के PNB ब्रांच में बड़ा घोटाला, खाताधारकों की करोड़ों के FD हुई गायब

