हरियाणा के करनाल(Karnal) जिले के तरावड़ी से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की। इस मौके पर किसानों के साथ चौपाल चर्चा की गई और पौधारोपण समेत अभियान से जुड़ी कई गतिविधियां आयोजित हुईं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को मिट्टी की सेहत बनाए रखने और फसल अवशेषों का सही तरीके से इस्तेमाल करने के लिए जागरूक करना रहा।
इस कार्यक्रम में हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. मांगी लाल जाट भी शामिल हुए।
पराली जलाने से पर्यावरण को नुकसान
कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से अपील की कि वे खेतों में पराली जलाने से बचें। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। इसलिए किसानों को पराली के निपटारे के लिए दूसरे विकल्प अपनाने चाहिए।
उन्होंने रासायनिक खादों और कीटनाशकों का इस्तेमाल भी जरूरत के अनुसार संतुलित मात्रा में करने पर जोर दिया। इसका उद्देश्य खेती की उत्पादकता बनाए रखने के साथ जमीन की उर्वरता और पर्यावरण की सुरक्षा करना है।
पराली बेचकर किसान कर सकते हैं कमाई
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पराली किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का जरिया भी बन सकती है। उनके अनुसार, किसान फसल अवशेष बेचकर 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल तक कमा सकते हैं। इससे पराली को बेकार समझकर जलाने के बजाय उसका उपयोग करने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है।
पराली के प्रबंधन का एक अन्य तरीका उसे खेत की मिट्टी में मिलाना है। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और उसकी उर्वरता सुधारने में मदद मिल सकती है।
टिकाऊ खेती पर दिया जोर
‘खेत बचाओ अभियान’ के जरिए किसानों को खेती के ऐसे तरीके अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिनसे जमीन की गुणवत्ता बनी रहे और पर्यावरण पर भी कम असर पड़े। पराली का उचित प्रबंधन, खाद और कीटनाशकों का संतुलित इस्तेमाल तथा मिट्टी की देखभाल टिकाऊ खेती के महत्वपूर्ण पहलू हैं। इस पहल के तहत किसानों को जागरूक करने और फसल अवशेषों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
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