महाराष्ट्र में एक्सपायर हो चुके और खराब खाद्य उत्पादों की बिक्री के मामले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बड़ी कार्रवाई की है। ठाणे और पुणे जिलों में चलाए गए अभियान के दौरान कुल 48.09 लाख रुपये से अधिक मूल्य का खाद्य स्टॉक जब्त किया गया। इसके बाद पुलिस ने रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, रिलायंस रिटेल, ब्लिंकिट और जोमैटो हाइपरप्योर से जुड़े अधिकारियों व कर्मचारियों समेत 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले में डिस्पोजल एजेंसी संचालकों और स्थानीय सप्लायरों के नाम भी शामिल हैं। ठाणे के शांतिनगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच का मुख्य पहलू यह है कि जिन खाद्य उत्पादों को नष्ट किया जाना था, वे कथित तौर पर दोबारा बिक्री के लिए बाजार तक कैसे पहुंचे।
14 और 15 अक्टूबर को सात टीमों ने की छापेमारी
FDA सूत्रों के अनुसार, 14 और 15 अक्टूबर को ठाणे और पुणे जिलों में कई ठिकानों पर एक साथ निरीक्षण किया गया। इसके लिए सहायक आयुक्तों और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की सात टीमें गठित की गई थीं। कार्रवाई के दौरान भिवंडी के एक डिस्पोजल यार्ड से 24 लाख रुपये से अधिक के उत्पाद जब्त किए गए। वाडपे स्थित रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के गोदाम से करीब 4.92 लाख रुपये और उसताने स्थित जोमैटो हाइपरप्योर की सुविधा से लगभग 7.81 लाख रुपये का सामान बरामद हुआ। जब्त स्टॉक की कुल कीमत 48,09,924 रुपये बताई गई है। टीमों ने खाद्य उत्पादों की सूची तैयार की, नमूने लिए और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए। साथ ही निर्देश दिया गया कि जब्त सामान को न कहीं ले जाया जाए, न बेचा जाए और न ही नष्ट किया जाए।
नष्ट किए जाने वाले सामान को दोबारा बेचने का आरोप
प्रारंभिक जांच के हवाले से सामने आया है कि एक्सपायर, खराब और ग्राहकों द्वारा लौटाए गए खाद्य उत्पादों को नष्ट किया जाना था। आरोप है कि इन्हें डिस्पोजल एजेंसियों, बिना लाइसेंस वाले सॉर्टिंग यार्ड और बिचौलियों के माध्यम से दोबारा रिटेलरों तक पहुंचाया गया। जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ डिस्पोजल एजेंसियों ने सामान वास्तव में नष्ट किए बिना ही ऐसे प्रमाणपत्र और दस्तावेज जारी किए, जिनमें उत्पादों को नष्ट करने का दावा था। FDA अधिकारियों को रिकॉर्ड में स्टॉक की मात्रा और भेजने-प्राप्त करने वाली इकाइयों के विवरण में भी विसंगतियां मिलीं। सूत्रों के मुताबिक, भिवंडी के एक बिना लाइसेंस वाले यार्ड में सामान छांटकर बिक्री योग्य दिखने वाले पैकेट अलग किए जाते थे। बाद में इन्हें बिचौलियों और सप्लायरों के जरिए आगे भेजा जाता था। भिवंडी के गुलजार नगर स्थित एक रिटेल आउटलेट पर भी एक्सपायर और लीक हो रहे उत्पाद बिक्री के लिए रखे मिलने की बात सामने आई। यह दुकान कथित तौर पर बिना लाइसेंस और खरीद बिल के चल रही थी।
पांच प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित
एफआईआर में रिलायंस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के वी. सुब्रमण्यम और अशोक कुमार सिंह, रिलायंस रिटेल के विजय भिकाजी खर्माले और नीलेश रामदासराव देशमुख के नाम शामिल हैं। इसके अलावा ब्लिंकिट कॉमर्स के अर्बिंदर सिंह ढींसा और दीपक सिंह, जोमैटो हाइपरप्योर के आबिद शेख तथा डिस्पोजल एजेंसी और सप्लाई से जुड़े अन्य लोगों को भी नामजद किया गया है। अधिकारी के अनुसार, 15 अक्टूबर को सुनवाई के बाद पांच प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए, जबकि बिना लाइसेंस चल रही चार जगहों का कामकाज बंद करा दिया गया। मामले में आगे की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी।
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