किसी पुराने हादसे, ब्रेकअप के दर्द या शर्मनाक यादों से परेशान लोगों के लिए विज्ञान की दुनिया से एक बड़ी राहत की खबर आई है। न्यूरोसाइंस में हुए एक क्रांतिकारी शोध ने यह साबित कर दिया है कि इंसानी दिमाग से खौफनाक और कड़वी यादों के असर को मिटाना अब पूरी तरह संभव है। अब तक केवल साइंस-फिक्शन फिल्मों का हिस्सा लगने वाली यह तकनीक आने वाले कुछ ही सालों में आम लोगों के इलाज के लिए उपलब्ध हो सकेगी।
चूहों के दिमाग पर लेजर लाइट का सफल प्रयोग
बोस्टन यूनिवर्सिटी के ‘सेंटर फॉर ब्रेन एंड मेमोरी’ के एसोसिएट प्रोफेसर स्टीव रामिरेज ने अपनी नई किताब ‘हाउ टू चेंज अ मेमरी’ में खुलासा किया है कि हर हादसा दिमाग की कोशिकाओं पर एक भौतिक छाप छोड़ता है, जिसे ‘इनग्राम’ कहा जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के वैज्ञानिकों ने ‘ऑप्टोजेनेटिक्स’ तकनीक की मदद से चूहों के दिमाग में लेजर लाइट डालकर डरावनी यादें स्टोर करने वाले हिस्से ‘अमिग्डाला’ की कोशिकाओं को सफलतापूर्वक निष्प्रभावी कर दिया।
बिना किसी सर्जरी के होगा इंसानों का इलाज
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि इंसानों में यादें मिटाने के लिए किसी भी तरह की सर्जरी या दिमाग खोलने की जरूरत नहीं होगी। इसके बजाय, एडवांस्ड थेरेपी और वैज्ञानिक भाषा के संयोजन से बुरी यादों से जुड़े तनाव को बेअसर किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि मरीज को अपने अतीत के हादसे का तथ्य तो याद रहेगा, लेकिन उससे जुड़ा खौफ, दर्द और मानसिक तनाव पूरी तरह से गायब हो जाएगा।
डिप्रेशन और PTSD के मरीजों के लिए वरदान
इस खोज का मुख्य उद्देश्य केवल यादें मिटाना नहीं, बल्कि गंभीर मानसिक समस्याओं से जूझ रहे करोड़ों मरीजों को जीवनदान देना है। यह तकनीक भविष्य में एंग्जायटी, डिप्रेशन और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) जैसी बीमारियों के इलाज के नए रास्ते खोलेगी। कड़वी यादों की तकलीफ को कम करके यह न्यूरो-तकनीक मानसिक आघात से पीड़ित लोगों को एक सामान्य और तनावमुक्त जीवन जीने में मदद करेगी।
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