अफगानिस्तान ने वैश्विक कूटनीति और व्यापारिक मोर्चे पर एक बड़ा कदम उठाते हुए चीन के साथ सीधा सड़क संपर्क स्थापित कर लिया है। उत्तर-पूर्वी बदख्शां प्रांत के ऐतिहासिक वाखान कॉरिडोर के रास्ते चीन के शिनजियांग क्षेत्र को जोड़ने वाली 121 किलोमीटर लंबी सड़क का औपचारिक उद्घाटन कर दिया गया है। हालांकि यह सड़क अभी कच्चे स्वरूप में है, लेकिन इसके चालू होने से दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीधी आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों का नया मार्ग खुल गया है।
55 लाख डॉलर की लागत से 2 साल में तैयार हुई सड़क
इस रणनीतिक हाईवे का निर्माण कार्य लगभग दो वर्ष पूर्व आरंभ हुआ था, जिसे करीब 365 मिलियन अफगानी यानी लगभग 55 लाख अमेरिकी डॉलर की कुल लागत से पूरा किया गया है। अफगानिस्तान के ग्रामीण पुनर्वास और विकास मंत्री अब्दुल लतीफ मंसूर ने उद्घाटन समारोह के दौरान कहा कि इस मार्ग का देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सामरिक, राजनीतिक और आर्थिक मूल्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार कम विकसित इलाकों के विकास को प्राथमिकता दे रही है।
बिना विदेशी इंजीनियरों के अफगान टीम ने किया कमाल
इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका स्वदेशी निर्माण है। अफगान प्रशासन के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट में किसी भी विदेशी इंजीनियर या अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार की सेवाएं नहीं ली गईं। इसे पूरी तरह स्थानीय अफगान इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया गया है। इसे देश की इंजीनियरिंग क्षमता और बुनियादी ढांचे के आत्मनिर्भर विकास की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
ताजिकिस्तान और पीओके के बीच स्थित है वाखान कॉरिडोर
वाखान कॉरिडोर अफगानिस्तान के बदख्शां प्रांत में स्थित एक बेहद संकरी और दुर्गम भौगोलिक पट्टी है। यह क्षेत्र एक तरफ ताजिकिस्तान और दूसरी तरफ पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान सीमा के मध्य स्थित है। भौगोलिक रूप से बेहद दुर्गम होने के बावजूद, अफगानिस्तान हमेशा से इसे चीन के साथ सीधे व्यापारिक और रणनीतिक जुड़ाव के सबसे प्रमुख माध्यम के रूप में देखता रहा है।
सीपेक प्रोजेक्ट में पिछड़ रहे पाकिस्तान को दी मात
जहां एक ओर पाकिस्तान और चीन अपने अरबों डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के 2030 तक पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं अफगानिस्तान ने महज तीन वर्षों के भीतर सड़क निर्माण पूरा कर चीन तक अपनी पहुंच बना ली है। अफगान सरकार इस सड़क को केवल आवाजाही का जरिया न मानकर चीन के साथ व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले रणनीतिक सेतु के रूप में देख रही है।
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