सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में लंबित पड़े करोड़ों रुपये के ई-चालानों की वसूली को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त कदम उठाने का कड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने ‘एस राजसीकरण बनाम भारत संघ’ मामले की सुनवाई के दौरान साफ कहा कि महज लाखों की संख्या में ई-चालान काटना काफी नहीं है, बल्कि उनसे जुड़े जुर्माने की वसूली भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस आदेश के बाद अब सड़क पर वाहनों की रैंडम चेकिंग के दौरान यदि किसी गाड़ी पर पुराना चालान बकाया पाया जाता है, तो अधिकारियों के पास उस वाहन को मौके पर ही जब्त करने का अधिकार होगा।
PUC और फिटनेस सर्टिफिकेट पर लगेगी रोक
बकाया चालान न भरने वाले वाहन चालकों पर केवल जब्ती की तलवार ही नहीं लटकेगी, बल्कि सरकारों को कई अन्य दंडात्मक कदम उठाने के अधिकार भी दिए गए हैं। बकाया जुर्माना साफ न होने तक संबंधित वाहनों को परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है, जिससे गाड़ी का मालिकाना हक किसी दूसरे के नाम ट्रांसफर नहीं हो सकेगा। इसके साथ ही वाहन के लिए जरूरी फिटनेस सर्टिफिकेट और पीयूसी (PUC) जारी करने पर पूरी तरह रोक रहेगी और गाड़ी से जुड़ी अन्य ऑनलाइन नागरिक सेवाओं को भी फ्रीज कर दिया जाएगा। हालांकि, जिन चालानों के मामले पहले से अदालत में लंबित हैं, उन्हें इस सीधी दंडात्मक कार्रवाई से फिलहाल राहत मिलेगी।
देश भर में 48,908 करोड़ रुपये का जुर्माना अभी भी बकाया
अदालत में पेश आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 से 2026 तक देश भर में कुल 48.60 करोड़ ई-चालान जारी किए गए, जिनकी कुल राशि 74,668 करोड़ रुपये थी। इनमें से केवल 18.60 करोड़ चालानों से 25,759 करोड़ रुपये की वसूली हो सकी है, जबकि करीब 30 करोड़ चालान और 48,908 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि अभी भी पेंडिंग है। राज्यों की सूची में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, जहां अकेले 9.67 करोड़ चालान दर्ज किए गए और उनसे 4,424 करोड़ रुपये की वसूली हुई। इसके अलावा कुल 16.94 करोड़ चालान मामलों में से 14.04 करोड़ केस विभिन्न अदालतों में लंबित चल रहे हैं।
साल 2026 में अब तक 12,615 करोड़ रुपये का चालान पेंडिंग
केवल चालू वर्ष 2026 के जनवरी से सितंबर के अंत तक के आंकड़ों को देखें तो स्थिति और भी चिंताजनक नजर आती है। इस अवधि में करीब 8.06 करोड़ ई-चालान काटे गए, जिनकी कुल रकम 15,039 करोड़ रुपये बैठती है। इसमें से महज 1.39 करोड़ चालानों के जरिए 2,424 करोड़ रुपये की वसूली हुई है, जबकि 6.68 करोड़ चालान और 12,615 करोड़ रुपये का राजस्व अब भी बकाया पड़ा हुआ है। इस साल 1.30 करोड़ मामले अदालतों को भेजे गए थे, जिनमें से 1.23 करोड़ मामले अभी भी न्याय प्रणाली में लंबित हैं।
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