Harvest Moon 2026: अगर आप आज यानी 26 सितंबर की रात आसमान देखने वाले हैं, तो आपको एक खूबसूरत खगोलीय नजारा देखने को मिल सकता है। सितंबर महीने की पूर्णिमा को Harvest Moon यानी हार्वेस्ट मून कहा जाता है। खास बात यह है कि आज चांद के साथ शनि ग्रह भी आसमान में दिखाई दे सकता है। मौसम साफ रहने पर दोनों को देखना आसान होगा।
रात 10:19 बजे पूर्णिमा चरम पर
भारत में आज रात करीब 10 बजकर 19 मिनट पर पूर्णिमा अपने चरम पर होगी। इस समय चंद्रमा अपनी पूर्ण अवस्था में होगा। हालांकि, चांद देखने के लिए रात 10:19 बजे तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है। पूर्णिमा के आसपास कई घंटों तक चंद्रमा लगभग पूरा गोल और चमकीला नजर आता है। इसलिए शाम को चंद्रोदय के बाद से देर रात तक इसे देखा जा सकता है।
चांद के साथ शनि ग्रह भी आएंगे नजर
आज के आसमान की खासियत सिर्फ Harvest Moon नहीं है। खगोलीय जानकारी के मुताबिक, चंद्रमा के साथ शनि ग्रह भी पूर्व दिशा में नजर आ सकते हैं। चांद की तेज रोशनी के बावजूद शनि एक चमकीले बिंदु के रूप में दिखाई दे सकता है। इसे देखने के लिए आम तौर पर किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं है, हालांकि साफ आसमान होने पर नजारा ज्यादा स्पष्ट रहेगा।
Harvest Moon नाम क्यों पड़ा?
Harvest Moon का नाम पुराने समय की खेती-किसानी से जुड़ा है। सितंबर के आसपास उत्तरी गोलार्ध में लगातार कई रातों तक चंद्रोदय के समय में सामान्य दिनों की तुलना में कम अंतर होता है। सामान्य तौर पर चंद्रमा हर दिन लगभग 50 मिनट बाद उगता है, लेकिन Harvest Moon के आसपास यह अंतर काफी कम हो सकता है। इससे पुराने समय में किसानों को सूर्यास्त के बाद भी कई रातों तक चांदनी मिलती थी, जिससे फसल काटने के लिए अतिरिक्त रोशनी उपलब्ध रहती थी।
Strawberry Moon से अलग है सितंबर का चांद
सितंबर की पूर्णिमा को Strawberry Moon नहीं कहा जाता। Strawberry Moon नाम जून की पूर्णिमा से जुड़ा है और इसका संबंध उत्तरी अमेरिका में स्ट्रॉबेरी की पारंपरिक फसल के मौसम से माना जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि उस दिन चांद स्ट्रॉबेरी जैसा लाल या गुलाबी दिखाई देता है। इसी तरह Pink Moon, Hunter’s Moon और Harvest Moon जैसे नाम भी अलग-अलग मौसमों और पारंपरिक कृषि कैलेंडर से जुड़े हैं।
आज भाद्रपद पूर्णिमा भी है
26 सितंबर को भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि भी है। हिंदू धर्म में इस पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इसे भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि माना जाता है और इसके साथ ही पितृपक्ष की शुरुआत होती है। इस दिन ऋषि तर्पण के साथ पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने की परंपरा भी जुड़ी है।
पूजा और दान का विशेष महत्व
भाद्रपद पूर्णिमा पर भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्रदेव की पूजा करने की परंपरा है। कई लोग इस दिन व्रत रखते हैं और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, फल और धन का दान करते हैं। पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ को भी शुभ माना जाता है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने की है खास परंपरा
इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूर्णिमा के दिन श्रद्धा और भक्ति से किए गए धार्मिक कार्य मन की शांति और सुख-समृद्धि से जुड़े माने जाते हैं। यह दिन पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करने का भी अवसर माना जाता है।
आज शाम पूर्व दिशा में देखें अद्भुद नजारा
अगर आज मौसम साफ है, तो सूर्यास्त के बाद पूर्व दिशा की ओर आसमान पर नजर डालें। चांद के साथ शनि ग्रह को देखने का मौका मिल सकता है। पूर्णिमा के चरम से पहले और बाद में भी चंद्रमा काफी समय तक लगभग पूरा गोल और चमकीला दिखाई देगा।
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