UNGA 2026: संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण के बाद भारत ने राइट ऑफ रिप्लाई के तहत जवाब दिया। भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी दावों पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर की बात करता है तो उसे पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर यानी PoK में लोगों के अधिकारों और हिंसा पर भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने पकिस्तान को तड़ातड़ जवाब देते हुए कहा, कि जम्मू-कश्मीर की बात छोड़ो, पीओके पर भी बात कर लो।
आतंकवाद पर भारत का सीधा हमला
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड पर सवाल उठाते हुए कहा कि, 9/11 हमले का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान में सेना की प्रमुख अकादमी के पास छिपा हुआ था। उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवाद, दोहरे रवैये और धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में सिंधु जल संधि को लेकर भारत को चेतावनी दी और पानी रोकने या मोड़ने की किसी कोशिश को ‘युद्ध की कार्रवाई’ माना जाएगा।
लोकतंत्र और सरकार पर भी निशाना
भारत ने पाकिस्तान के लोकतांत्रिक अधिकारों और मानवाधिकारों को लेकर दिए गए भाषण पर भी पलटवार किया। गहलोत ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां सरकार के चेहरे बदल सकते हैं, लेकिन वास्तविक फैसले लेने वाली ताकत को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। भारत ने पाकिस्तान में 27वें संविधान संशोधन और आजीवन कानूनी छूट का भी जिक्र किया।
धार्मिक कट्टरता का मुद्दा उठा
भारत ने पाकिस्तान पर धार्मिक असहिष्णुता और कट्टरता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान दिन में सुरक्षा और शांति की बात करता है, जबकि भारत के अनुसार सीमा पार आतंकवाद उसकी लंबे समय से चली आ रही नीति का हिस्सा रहा है। उन्होंने पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों और अल्पसंख्यकों की स्थिति का भी जिक्र किया।
PoK पर भारत ने घेरा
जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाए जाने पर भारत ने अपना रुख दोहराते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। साथ ही गहलोत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की स्थिति पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने रावलाकोट के लोगों का उदाहरण देते हुए वहां हत्याओं, हिंसा और बुनियादी अधिकारों से वंचित किए जाने का मुद्दा उठाया।
आतंकवाद पर भारत की चेतावनी
भारत ने कहा कि पिछले साल की कार्रवाई से यह संदेश दिया गया था कि आतंकवादियों के लिए सुरक्षित जगह नहीं होगी। गहलोत ने कहा कि आतंकवाद से अपनी रक्षा करना भारत का अधिकार है और यदि पाकिस्तान की तरफ से आतंकवाद जारी रहता है तो उसके परिणाम होंगे। भारत ने यह भी कहा कि इसका असर दोनों देशों के बीच अब तक बने संबंधों पर पड़ सकता है।
सिंधु जल संधि पर भी दो टूक
शहबाज शरीफ ने महासभा में सिंधु जल संधि को लेकर भारत की नीति की आलोचना की और कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने, बाधित करने या मोड़ने की कोशिश को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। भारत की ओर से पाकिस्तान के आतंकवाद के संदर्भ में जवाब दिया गया। सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की भागीदारी के साथ हुई थी।
भारत ने कहा- झूठ दोहराने से सच नहीं बनता
भारत ने अंत में कहा कि महासभा को पाकिस्तान की नीतियों को उनके वास्तविक स्वरूप में देखना चाहिए। गहलोत ने पाकिस्तान के आतंकवाद, छल और दोहरे रवैये को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि हर साल किसी दावे को दोहराने से वह सच नहीं बन जाता। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई के अधिकार को भी दोहराया।
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