भारतीय रेलवे के नेटवर्क को भविष्य की बढ़ती यातायात जरूरतों के लिए तैयार करने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ी योजना पर काम तेज किया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि रेलवे के सात हाई-डेंसिटी कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने की योजना है। इन प्रमुख रेल मार्गों को चार ट्रैक वाला बनाने का प्रस्ताव है, ताकि आने वाले वर्षों में यात्रियों और माल परिवहन का दबाव बेहतर तरीके से संभाला जा सके।
12 साल से जारी आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा
अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, रेलवे में पिछले 12 वर्षों से व्यापक स्तर पर बदलाव और आधुनिकीकरण का काम चल रहा है। इसी प्रक्रिया के तहत प्रमुख और व्यस्त रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य हाई-डेंसिटी रूट पर मौजूदा ट्रैक क्षमता को बढ़ाना है। फोर-ट्रैक या क्वाड्रुपलिंग के बाद एक ही कॉरिडोर पर ज्यादा ट्रेनों का संचालन संभव होगा और भविष्य में बढ़ने वाले ट्रैफिक को संभालने में मदद मिलेगी। परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है।
गोल्डन क्वाड्रिलेटरल के चारों रूट योजना में शामिल
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस विस्तार योजना में देश के सबसे महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क में शामिल गोल्डन क्वाड्रिलेटरल के चार प्रमुख हिस्से शामिल हैं। इसमें दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली रेल मार्ग आते हैं। इसके अलावा गोल्डन क्वाड्रिलेटरल के दो डायगोनल यानी दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता कॉरिडोर भी इस योजना का हिस्सा हैं। सातवें हाई-डेंसिटी कॉरिडोर के तौर पर दिल्ली-गुवाहाटी मार्ग को शामिल किया गया है। इन सभी रूटों पर ट्रैक क्षमता बढ़ाने के लिए क्वाड्रुपलिंग की योजना बनाई गई है।
4,000 किलोमीटर के लिए DPR पर काम जारी
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि सातों कॉरिडोर की परियोजनाओं को एक साथ पूरा करने के बजाय अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाया जा रहा है। फिलहाल करीब 4,000 किलोमीटर रेल मार्ग के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। इन रूटों पर क्षमता बढ़ने से यात्री ट्रेनों के साथ मालगाड़ियों के संचालन को भी अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। रेलवे के आधुनिकीकरण के तहत नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और भविष्य की परिवहन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इन हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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