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जीजा बना फर्जी IAS, साला बना पुलिसवाला! जानिए कैसे चल रहा था जीजा-साले का ठगी का खेल…

बिहार की राजधानी पटना में फर्जी सरकारी अधिकारी और पुलिसकर्मी बनकर लोगों को चूना लगाने वाली जीजा-साले की एक शातिर जोड़ी का भंडाफोड़ हुआ है। पटना के सचिवालय थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उनके कब्जे से पुलिस की वर्दी, दो फर्जी पहचान पत्र (आईकार्ड), तीन मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, मुहर (स्टांप) और दो फर्जी प्रशस्ति पत्र बरामद किए हैं।

हेल्थ डिपार्टमेंट का अफसर और फर्जी पुलिस कांस्टेबल

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अजय कुमार शुक्ल और उसके साले राजा कुमार के रूप में हुई है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि अजय कुमार शुक्ल खुद को स्वास्थ्य विभाग का अनुभाग अधिकारी (सेक्शन ऑफिसर) बताता था। वहीं, अपने फर्जीवाड़े को पुख्ता रूप देने और लोगों पर धाक जमाने के लिए उसने अपने साले राजा कुमार को फर्जी पुलिस कांस्टेबल बना रखा था, जिसके लिए बाकायदा पुलिस की वर्दी और जाली पहचान पत्र का इस्तेमाल किया जाता था।

IAS अधिकारियों के नाम से बनाए फर्जी प्रशस्ति पत्र

जांच के दौरान आरोपियों के पास से वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारियों के नाम से जारी फर्जी प्रशस्ति पत्र भी मिले हैं। इनमें आईएएस एस. सिद्धार्थ और आनंद किशोर के नाम शामिल हैं। पुलिस अब इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही है कि इन फर्जी हस्ताक्षरों और दस्तावेजों का इस्तेमाल किन-किन लोगों को झांसे में लेने और विश्वास जीतने के लिए किया जा रहा था।

सचिवालय में नौकरी का झांसा देकर बनाते थे शिकार

प्रारंभिक जांच के अनुसार, अजय कुमार शुक्ल खुद को स्वास्थ्य विभाग का बड़ा अधिकारी बताकर बेरोजगार युवाओं को सचिवालय में सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देता था और उनसे मोटी रकम ऐंठता था। इस दौरान उसका साला खाकी वर्दी में साथ रहकर लोगों पर प्रभाव बनाता था। पुलिस बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और इस नेटवर्क में अन्य कौन से लोग शामिल हैं।

नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस

मामले की पुष्टि करते हुए सिटी एसपी ममता कल्याणी ने बताया कि सचिवालय थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों को रंगे हाथ दबोचा है। फिलहाल पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है और उनके पूरे नेटवर्क तथा ठगी के तौर-तरीकों का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है।

 

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