राजस्थान के डीग जिले में मिलावटी पनीर बनाने और बाजारों में खपाने के कथित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों ने दो अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर करीब 1800 किलो मिलावटी पनीर जब्त किया। अधिकारियों के मुताबिक, इस पनीर को दूध के बजाय सोयाबीन, पामोलीन ऑयल और स्किम्ड मिल्क पाउडर जैसी सामग्रियों के मिश्रण से तैयार किया जा रहा था। जब्त पनीर को मौके पर ही नष्ट करा दिया गया। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान दो लोगों को पकड़ा है, जबकि मुख्य आरोपियों की तलाश जारी है।
1600 किलो पनीर मौके पर नष्ट
पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ के निर्देशन में की गई कार्रवाई के दौरान पहली छापेमारी गांव जाजमका में हुई। पुलिस ने शरीफ के मकान में संचालित मकसूद की डेयरी पर दबिश दी। आरोप है कि यहां सोयाबीन और पामोलीन ऑयल का इस्तेमाल कर नकली पनीर बनाया जा रहा था। पुलिस टीम को देखकर कुछ लोग मौके से भाग गए, जबकि मुनीम साहिल, निवासी गढ़ी झील पट्टी, को गिरफ्तार कर लिया गया। इस ठिकाने से 1600 किलो मिलावटी पनीर बरामद हुआ, जिसे अधिकारियों ने मौके पर ही नष्ट करा दिया। दूसरी कार्रवाई मांची के जंगल में अयूब और मुफीद की डेयरी पर की गई। यहां पिकअप वाहन और टीनशेड में बनाए गए अस्थायी प्लांट में पनीर तैयार किया जा रहा था। पुलिस ने अल्ली उर्फ अलीजान को पकड़ लिया। मौके से 200 किलो पनीर के साथ एसएमपी पाउडर के 18 कट्टे, रिफाइंड पामोलीन ऑयल, सोयाबीन ऑयल, मशीन क्लीन पाउडर और एक पिकअप वाहन जब्त किया गया।
दिल्ली-NCR से हरियाणा और यूपी तक पहुंच रहा था पनीर
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि तैयार पनीर की सप्लाई हर दो से तीन दिन में की जाती थी। इसे दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और ग्रेटर नोएडा समेत कई शहरों के बाजारों में भेजा जाता था। इसके अलावा हरियाणा और उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में भी इसकी आपूर्ति किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मिलावटी पनीर किन कारोबारियों के जरिए बाजार तक पहुंचाया जाता था और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
मुख्य आरोपियों की तलाश जारी
कार्रवाई के बाद दोनों ठिकानों को सील कर दिया गया है। पुलिस अब कथित मुख्य संचालकों मकसूद, साद, अयूब और मुफीद समेत अन्य संदिग्धों की तलाश में दबिश दे रही है। जब्त सामग्री और पनीर की प्रकृति को लेकर संबंधित विभागों की जांच भी अहम होगी। स्वास्थ्य विभाग ने मिलावटी खाद्य पदार्थों से होने वाले संभावित नुकसान को लेकर चिंता जताई है। अधिकारियों के अनुसार, खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री और उसकी गुणवत्ता की जांच जरूरी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
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