रक्षाबंधन से पहले राखी बाज़ार में स्वदेशी और स्थानीय रूप से बने उत्पादों की मांग तेज़ी से बढ़ रही है। व्यापारियों को उम्मीद है कि इस साल देश का राखी का कारोबार लगभग 25,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा।
कॉन्फेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुमानों का हवाला देते हुए एक रिपोर्ट के अनुसार, मिठाइयों, उपहारों, कपड़ों, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूखे मेवों सहित त्योहारों से जुड़ा कुल कारोबार 30,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकता है।
स्वदेशी थीम राखी बाज़ार को नया रूप दे रही हैं
दिल्ली के चांदनी चौक, सदर बाज़ार, करोल बाग, लाजपत नगर और राजौरी गार्डन जैसे बाज़ारों में 28 अगस्त को होने वाले त्योहार से पहले चहल-पहल बढ़ गई है। पारंपरिक डिज़ाइनों के साथ-साथ, ‘विकसित भारत’, ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘नारी वंदन’, ‘लखपति दीदी’, ‘ब्रह्मोस’ और ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र’ जैसी थीम वाली राखियां भी खरीदारों को आकर्षित कर रही हैं।
बाज़ार में महिला उद्यमियों और कारीगरों की भागीदारी भी बढ़ रही है। महिलाओं के समूह दिल्ली और पड़ोसी राज्यों में खुदरा विक्रेताओं के लिए हाथ से बनी राखियां तैयार कर रहे हैं। एक समूह ने बताया कि हर राखी को बनाने में लगभग 3-4 रुपये का खर्च आता है और इसे बाज़ार में 6-7 रुपये में बेचा जाता है, जबकि डिज़ाइन के आधार पर खुदरा कीमतें लगभग 10 रुपये से शुरू होती हैं।
स्थानीय कारीगर पारंपरिक राखियों से आगे बढ़कर नए प्रयोग कर रहे हैं
व्यापारियों का कहना है कि घरेलू उत्पादों को पसंद किए जाने के कारण बाज़ार में चीन में बनी राखियों की मौजूदगी कम हुई है। CAIT के प्रतिनिधियों ने इस बदलाव का कुछ श्रेय 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद ग्राहकों की बदलती सोच को दिया है।
साथ ही, बाज़ार क्षेत्रीय कारीगरी को भी अपना रहा है। उत्पादों में नागपुर की खादी राखियां, जयपुर के सांगानेरी डिज़ाइन, पुणे की बीज वाली राखियां, असम की चाय-पत्ती वाली राखियां, कोलकाता की जूट की राखियां और बिहार की बांस व मधुबनी कला वाली राखियां शामिल हैं।
उत्पादन में शामिल कई महिलाओं के लिए, यह मौसमी कारोबार मुख्य रूप से घर की अतिरिक्त आय का ज़रिया है। कारीगर अन्य त्योहारों के दौरान दीये और सजावटी लाइटें जैसे उत्पाद भी बनाते हैं। यह चलन भारत की त्योहारों से जुड़ी अर्थव्यवस्था में स्वयं सहायता समूहों, महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों और पारंपरिक कारीगरों को बड़ी भूमिका दे रहा है।
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