France Protests Violent: फ्रांस में महंगाई, सरकारी खर्च और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन शनिवार को हिंसक रूप ले गया। देश के कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने दुकानों, सरकारी इमारतों और सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाया। कई जगह आगजनी और लूटपाट हुई, जबकि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़पें हुईं।
5.50 लाख लोगों ने किया प्रदर्शन
BBC के मुताबिक, पूरे फ्रांस में करीब 5,50,000 लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। अकेले राजधानी पेरिस में लगभग 1.10 लाख प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे। शुरुआत में छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था और कामकाजी परिस्थितियों को लेकर आंदोलन शुरू किया था, लेकिन बाद में इसमें शिक्षक, कर्मचारी, किसान, ट्रेड यूनियन, पेंशनभोगी और येलो वेस्ट आंदोलन के समर्थक भी शामिल हो गए।
Apple और बड़े लग्जरी स्टोर निशाने पर आए
बोर्डो में उपद्रवियों ने कई महंगे ब्रांडों की दुकानों के शीशे तोड़ दिए। Apple के अलावा Louis Vuitton और Hermes के आउटलेट भी निशाने पर रहे। पेरिस में नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने दुकानों और रेस्तरां में तोड़फोड़ की। कई स्थानों पर बैरिकेड में आग लगा दी गई और सुरक्षाबलों के साथ झड़पें हुईं।
पेरिस से बाहर भी बिगड़े हालात
हिंसा का असर केवल पेरिस और बोर्डो तक सीमित नहीं रहा। ल्योन, मार्सिले, लिले, रूएन, नांतेस और टूलूज समेत कई शहरों में आगजनी, तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आईं। कई जगह कारों को भी आग के हवाले किया गया।
सरकारी इमारतों में भी तोड़फोड़
ल्योन में शहर के पर्यटन केंद्र में आग लगाए जाने की खबर सामने आई। मार्सिले और लिले में प्रदर्शनकारियों के नगर निगम की इमारतों में घुसने की जानकारी सामने आई। BFMTV के अनुसार, मार्सिले के नगर निगम मुख्यालय में उपद्रवियों ने फ्रांस के राष्ट्रीय प्रतीक मैरिएन की प्रतिमा गिरा दी और टीवी सेट तोड़ दिए। दीवार पर अराजकतावादी प्रतीक भी बनाया गया।
पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन चलाए
हिंसक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। कुछ नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने आंसू गैस से बचने के लिए चश्मे और हुड पहन रखे थे। इस दौरान राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के आधिकारिक आवास एलिसी पैलेस में घुसने की धमकी दिए जाने की भी खबर सामने आई।
1200 लोगों की गिरफ्तारी
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के अनुसार, देशभर में करीब 1200 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें सैकड़ों लोग पेरिस से पकड़े गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाना था। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे और कुछ हिंसक समूहों ने माहौल बिगाड़ा।
वामपंथी संगठनों पर आरोप
प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने भी कुछ वामपंथी संगठनों पर हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि कुछ अवसरवादी समूहों ने छात्रों के आंदोलन का फायदा उठाकर दुकानों में लूटपाट की और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
143 साल पुराना टाउन हॉल आग में तबाह
लिमोज शहर में 143 साल पुराने ऐतिहासिक टाउन हॉल में भीषण आग लगा दी गई। आग के कारण इमारत की छत का एक हिस्सा ढह गया और भवन को भारी नुकसान पहुंचा। यह टाउन हॉल वर्ष 1883 में बनकर तैयार हुआ था और 1975 में इसे ऐतिहासिक स्मारक के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। 17 अक्टूबर 2026 को प्रदर्शन के दौरान नकाबपोश लोगों ने इसकी खिड़कियां तोड़कर अंदर प्रवेश किया और आग लगा दी।
मैक्रों ने दी सख्त चेतावनी
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा और तोड़फोड़ पर सख्त होते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, हमले और लूटपाट में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटे सुरक्षाबलों का समर्थन भी किया।
महंगाई और सेवाओं में कटौती से नाराजगी
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में बढ़ती महंगाई से राहत, उच्च शिक्षा के लिए अधिक बजट, शिक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी, पेंशन की सुरक्षा और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती का विरोध शामिल है। हिंसा के बाद अब फ्रांस में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक सुरक्षा और सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर बहस तेज हो गई है।
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