Ectopic Tooth: तमिलनाडु के मदुरै में डॉक्टरों के सामने मेडिकल साइंस का बेहद दुर्लभ मामला सामने आया है। अरविंद आई हॉस्पिटल में 16 साल का एक लड़का बाईं पलक पर करीब एक महीने से बनी सूजन की शिकायत लेकर पहुंचा। जांच के दौरान डॉक्टरों को आंख के सॉकेट के ऊपरी हिस्से में दांत जैसी संरचना दिखाई दी। सर्जरी के बाद पता चला कि यह कोई ट्यूमर नहीं, बल्कि पूरी तरह विकसित कैनाइन यानी कुत्ते जैसा दांत था। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऊपरी ऑर्बिट में एक्टोपिक दांत का यह दुनिया में रिपोर्ट किया गया पहला मामला है।
एक महीने से थी पलक पर सूजन
लड़के की बाईं पलक करीब एक महीने से सूजी हुई थी। खास बात यह थी कि उसे किसी तरह का दर्द नहीं था और न ही पहले उस हिस्से पर चोट लगी थी। जब सूजन का कारण समझ नहीं आया तो उसने डॉक्टर से जांच कराने का फैसला किया।
जांच में दिखीं दो सख्त सफेद संरचनाएं
डॉक्टरों ने जांच के दौरान सूजन वाली जगह के भीतर की तरफ दो सख्त और सफेद रंग की उभरी हुई संरचनाएं देखीं। छूने पर ये उभार काफी सख्त और चिकने महसूस हुए। इसके बाद सीटी स्कैन कराया गया। इसमें पता चला कि आंख के सॉकेट के ऊपरी हिस्से से दांत जैसी संरचना निकल रही थी, जिसमें क्राउन और जड़ दोनों मौजूद थे। बाहर की ओर यह दो नुकीले दांत जैसी संरचनाओं के रूप में दिखाई दे रही थी।
सर्जरी के बाद सामने आया असली दांत
डॉक्टरों ने ऑपरेशन करके इस संरचना को बाहर निकाला। जांच में पता चला कि यह पूरी तरह विकसित कैनाइन दांत है। इसमें ट्यूमर का कोई हिस्सा नहीं मिला। मेडिकल भाषा में शरीर के असामान्य स्थान पर विकसित होने वाले ऐसे दांत को ‘एक्टोपिक टूथ’ कहा जाता है।
क्या होता है एक्टोपिक टूथ?
एक्टोपिक टूथ वह दांत होता है जो अपनी सामान्य जगह यानी मुंह में न निकलकर शरीर के किसी असामान्य हिस्से में विकसित हो जाता है। कुछ मामलों में दांत मुंह के भीतर ही गलत स्थिति में होते हैं, जबकि दुर्लभ परिस्थितियों में वे मुंह से बिल्कुल अलग जगह पर विकसित हो सकते हैं। इस किशोर के मामले में दांत आंख के ऊपरी हिस्से में था, जहां सामान्य रूप से दांत बनने की कोई संभावना नहीं होती।
पहले टेराटोमा होने का था संदेह
डॉक्टरों ने शुरुआत में आशंका जताई थी कि यह टेराटोमा नामक एक विशेष प्रकार का ट्यूमर हो सकता है। इस तरह के ट्यूमर में हड्डी या दांत जैसे ऊतक मौजूद हो सकते हैं। हालांकि, इमेजिंग और सर्जरी के बाद निकाले गए ढांचे की जांच से स्पष्ट हो गया कि यह ट्यूमर नहीं, बल्कि वास्तविक और परिपक्व दांत है।
एक्टोपिक दांत का इलाज कब जरूरी?
एक्टोपिक दांत को निकालना है या नहीं, यह उसकी स्थिति और उससे होने वाली परेशानी पर निर्भर करता है। अगर दांत किसी समस्या का कारण नहीं बन रहा हो तो डॉक्टर कई बार केवल निगरानी करते हैं। लेकिन संक्रमण, आसपास के हिस्सों को नुकसान, किसी रास्ते में रुकावट या सिस्ट से जुड़ी समस्या होने पर सर्जरी जरूरी हो सकती है। सीटी स्कैन से दांत की स्थिति और आंख, नसों तथा रक्त वाहिकाओं से उसकी दूरी का पता लगाया जाता है।
नाक और साइनस में भी मिल चुके हैं ऐसे दांत
एक्टोपिक दांत नाक, ठोड़ी, गाल की हड्डी के भीतर मौजूद मैक्सिलरी साइनस और आंख के सॉकेट के निचले हिस्से में पहले भी पाए जा चुके हैं। नाक या साइनस में मौजूद ऐसे दांतों को कई मामलों में एंडोस्कोप की मदद से निकाला जाता है। यह कैमरे और सर्जिकल उपकरणों वाली पतली ट्यूब होती है, जिसे नथुने के रास्ते डालकर दांत निकाला जा सकता है। एक समीक्षा में नाक या साइनस में एक्टोपिक दांत के 27 मामले सामने आए थे। इनमें नाक बंद होना, नाक बहना, चेहरे में दर्द और नाक से खून आना प्रमुख लक्षण थे।
ऊपरी ऑर्बिट में दांत का पहला मामला
डॉक्टर मेघना तंवर के अनुसार, उनकी जानकारी में ऊपरी ऑर्बिट यानी पलक और भौंह के बीच के हिस्से में एक्टोपिक दांत का यह पहला और अकेला रिपोर्ट किया गया मामला है। विकास के दौरान गड़बड़ी, आनुवंशिक कारण, संक्रमण या चोट को एक्टोपिक दांत के संभावित कारणों में माना जाता है, लेकिन इस लड़के के मामले में इसकी स्पष्ट वजह सामने नहीं आई। इमेजिंग में कोई दूसरा एक्टोपिक दांत भी नहीं मिला। डॉक्टरों का कहना है कि भविष्य में दोबारा ऐसा दांत विकसित होने की संभावना बेहद कम है।
Read More:
15 लाख में जमीन बेचकर लापता हुई 4 बच्चों की मां, परिजनों का आरोप – प्रेमी के साथ हुई फरार!

