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‘एकतरफा और भेदभावपूर्ण नियम …’, BRICS देशों ने ‘कार्बन टैक्स’ पर क्यों उठाए सवाल? जानिए क्या है ये

Carbon Tax: BRICS देशों ने ‘कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म’ (CBAM) जैसे एकतरफा, दंडात्मक और भेदभावपूर्ण उपायों का विरोध किया है। BRICS नेताओं का कहना है कि इस तरह के कदम जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों को कमजोर कर सकते हैं और खासकर विकासशील देशों की क्षमता पर दबाव डाल सकते हैं। इसका असर आयरन और स्टील, सीमेंट, फर्टिलाइजर तथा एल्युमिनियम जैसे अधिक कार्बन उत्सर्जन वाले उत्पादों के निर्यात पर पड़ने की आशंका है।

CBAM क्या है?

CBAM यानी कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके तहत अधिक कार्बन उत्सर्जन वाले सामान पर आयात के समय अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। शुल्क की गणना उस उत्पाद को बनाने के दौरान हुए कार्बन उत्सर्जन के आधार पर की जा सकती है। यूरोपीय संघ (EU) और ब्रिटेन (UK) भी इस तरह के कार्बन टैक्स को लागू करने की योजनाएं सामने रख चुके हैं।

भारत के लिए क्यों अहम?

BRICS का यह रुख भारत समेत उन विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी कंपनियां यूरोपीय और ब्रिटिश बाजारों में बड़ी मात्रा में सामान निर्यात करती हैं। आयरन और स्टील, सीमेंट, फर्टिलाइजर तथा एल्युमिनियम जैसे क्षेत्रों में कार्बन से जुड़ा अतिरिक्त शुल्क लागत बढ़ा सकता है और निर्यात प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है।

नई दिल्ली डिक्लेरेशन में विरोध

नई दिल्ली डिक्लेरेशन में BRICS नेताओं ने कहा कि वे CBAM जैसे उन उपायों के खिलाफ हैं, जिन्हें एकतरफा, दंडात्मक, भेदभावपूर्ण या संरक्षणवादी माना जाता है और जो अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं हैं। नेताओं ने चिंता जताई कि ऐसे कदम देशों, विशेष रूप से विकासशील देशों की जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता को कमजोर कर सकते हैं।

अनुकूलन क्षमता पर चिंता

BRICS के अनुसार, इस तरह की नीतियां विकासशील देशों के लिए जलवायु परिवर्तन के अनुरूप खुद को तैयार करना मुश्किल बना सकती हैं। इससे उनकी अनुकूलन क्षमता बढ़ाने और भविष्य में सामने आने वाले जलवायु जोखिमों से निपटने के प्रयास भी प्रभावित हो सकते हैं।

IPR पर बढ़ेगा सहयोग

BRICS देशों ने बौद्धिक संपदा अधिकार यानी IPR के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने पर भी सहमति जताई है। इसमें पेटेंट प्रक्रिया, पारंपरिक ज्ञान, भौगोलिक संकेतक (Geographical Indications), बौद्धिक संपदा के व्यावसायिक इस्तेमाल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। डिजिटल दौर में बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा को जरूरी बताया गया है।

AI और डेटा को लेकर चिंता

नेताओं ने AI के बढ़ते इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि AI के माध्यम से किसी देश या समुदाय के ज्ञान, विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों का गलत इस्तेमाल या गलत प्रस्तुतीकरण हो सकता है। साथ ही मौजूदा डेटा सेट और AI मॉडल में कई देशों और संस्कृतियों की पर्याप्त जानकारी नहीं होने से AI के परिणामों में असंतुलन पैदा होने की आशंका है। AI की ट्रेनिंग में इस्तेमाल सामग्री और उसके मालिकों के अधिकारों का ध्यान रखने के साथ विकासशील देशों की जरूरतों और प्राथमिकताओं को भी महत्व देने की बात कही गई है।

ग्लोबल वैल्यू चेन मजबूत करने पर जोर

BRICS ने ग्लोबल वैल्यू चेन (GVCs) को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया है। इसके तहत किसी उत्पाद के निर्माण से लेकर उसकी सप्लाई और बिक्री तक विभिन्न देशों में होने वाली पूरी प्रक्रिया को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने की दिशा में काम किया जाएगा। तकनीकी सहयोग, व्यापार को आसान बनाने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और औद्योगिक क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

कनेक्टिविटी और तकनीक पर फोकस

BRICS देशों ने कनेक्टिविटी बढ़ाने, बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और नई तकनीकों तक सुरक्षित तथा किफायती पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत बताई है। साथ ही आपसी व्यापार बढ़ाने के लिए नई नीतियों और तरीकों की संभावनाएं तलाशने पर भी सहमति बनी है।

SEZs बनेंगे सहयोग का माध्यम

घोषणा में स्पेशल इकोनॉमिक जोन यानी SEZs को व्यापार, निवेश, औद्योगिक सहयोग और नई तकनीक के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया है। BRICS देशों के अनुसार SEZs में बेहतर कारोबारी माहौल, मजबूत सुविधाएं और आसान नियम होने चाहिए, ताकि कंपनियों को विस्तार और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ने में मदद मिल सके।

2026-2030 की योजना पर जोर

BRICS ने GVCs पर साझा समझ के तहत तय वर्कप्लान को लागू करने और BRICS GVC कार्य योजना 2026-2030 को आगे बढ़ाने का समर्थन किया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच औद्योगिक, तकनीकी और व्यापारिक सहयोग को और मजबूत करना है।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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