Repo Rate Hike: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के नतीजे सामने आ गए हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक में लिए गए फैसलों का ऐलान करते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट (BPS) की बढ़ोतरी की है। इसके बाद रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया है। केंद्रीय बैंक के इस फैसले से होम लोन और कार लोन समेत अन्य कर्ज लेने वाले ग्राहकों पर EMI का बोझ बढ़ने की संभावना है।
करीब साढ़े तीन साल बाद बड़ा बदलाव
रेपो रेट इससे पहले करीब साढ़े तीन साल से 5.25 फीसदी पर स्थिर था। RBI के इस फैसले का सीधा असर बैंकिंग सिस्टम की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। अगर बैंक इस बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों तक पहुंचाते हैं, तो नए कर्ज लेने वालों के साथ-साथ फ्लोटिंग ब्याज दर वाले मौजूदा लोन ग्राहकों की EMI भी बढ़ सकती है।
वेस्ट एशिया संघर्ष और महंगे कच्चे तेल की चिंता
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपने संबोधन की शुरुआत वेस्ट एशिया संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के जिक्र के साथ की। उन्होंने वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने के खतरे और ऊर्जा कीमतों के चलते खाने-पीने की चीजों समेत अन्य वस्तुओं के दाम बढ़ने पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वैश्विक महंगाई का जोखिम और शेयर बाजार में अनिश्चितता का माहौल अभी भी बना हुआ है।
MPC में चर्चा के बाद लिया गया फैसला
तीन दिवसीय MPC बैठक में आर्थिक परिस्थितियों पर चर्चा के बाद रेपो रेट बढ़ाने का फैसला किया गया। केंद्रीय बैंक का यह कदम ऐसे समय आया है, जब वैश्विक स्तर पर महंगाई और ऊर्जा कीमतों को लेकर दबाव बना हुआ है। RBI का फोकस अब महंगाई को नियंत्रित रखने पर ज्यादा दिखाई दे रहा है।
पहले से जताई जा रही थी बढ़ोतरी की आशंका
साल 2026 में यह RBI की चौथी MPC बैठक थी। इससे पहले अप्रैल, जून और अगस्त में हुई बैठकों में रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर ही बरकरार रखा गया था। हालांकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और महंगाई के दबाव को देखते हुए एक्सपर्ट पहले से ही रेपो रेट में 25 BPS की बढ़ोतरी की आशंका जता रहे थे। अब RBI ने इस आशंका को सही साबित करते हुए दर में इजाफा कर दिया है।
मौद्रिक नीति का रुख भी बदला
रेपो रेट बढ़ाने के साथ RBI ने मौद्रिक नीति के रुख में भी बदलाव किया है। इसे पहले के ‘न्यूट्रल’ रुख से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ किया गया है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक का मुख्य जोर महंगाई को काबू में रखने पर है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी के जरिए मांग और महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने की कोशिश की जा सकती है।
आखिर क्या होता है Repo Rate?
रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर RBI कम अवधि के लिए बैंकों को कर्ज देता है। इसी दर के आधार पर बैंक अपने ग्राहकों को दिए जाने वाले कई तरह के लोन की ब्याज दरें तय करते हैं। RBI की MPC बैठक हर दो महीने में होती है और इसमें रेपो रेट समेत मौद्रिक नीति से जुड़े अहम फैसले लिए जाते हैं।
रेपो रेट बढ़ने से क्यों बढ़ सकती है EMI?
जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंकों के लिए केंद्रीय बैंक से कर्ज लेना महंगा हो जाता है। ऐसे में बैंक बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल सकते हैं और लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। इसका असर खासतौर पर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और अन्य कर्ज पर पड़ सकता है। वहीं, रेपो रेट में कटौती होने पर आमतौर पर लोन की ब्याज दरें कम होने और EMI का बोझ घटने की संभावना रहती है।
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