ड्रोन हमलों के बढ़ते खतरों से परेशान पाकिस्तानी पुलिस अब सुरक्षा चौकियों के बचाव के लिए एक अजीबोगरीब तरीका अपना रही है। अफगानिस्तान सीमा से सटे खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पुलिस और सुरक्षा चौकियों की छतों पर मछली पकड़ने वाले जाल लगाए जा रहे हैं। अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसका मुख्य उद्देश्य विस्फोटक सामग्री लेकर आने वाले ड्रोन के प्रोपेलर को हवा में ही फंसाना और हमले के असर को कम करना है। हंगू जिले से शुरू हुआ यह सुरक्षा उपाय अब कोहाट, करक, बन्नू, लक्की मरवत और डेरा इस्माइल खान जैसे अन्य संवेदनशील इलाकों में भी लागू किया जा रहा है।
जाल कैसे करेगा सुरक्षा और कितनी है लागत
सुरक्षा बल इस जाल को आधुनिक एंटी-ड्रोन प्रणाली का विकल्प नहीं, बल्कि सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत मान रहे हैं। पुलिस अधिकारी फैयाज खान के अनुसार, यदि ड्रोन जाल में उलझता है तो उसका प्रोपेलर बंद हो जाएगा और उसे निष्क्रिय किया जा सकेगा। इसके अलावा, विस्फोट होने की स्थिति में छर्रे और मलबा सीधे जवानों पर गिरने के बजाय दूसरी ओर छिटक जाएंगे। जहां आधुनिक ड्रोन रोधी सिस्टम बहुत महंगे होते हैं, वहीं एक पुलिस चौकी को इस जाल से ढकने में लगभग 4 लाख पाकिस्तानी रुपये (करीब 1.3 लाख भारतीय रुपये) का ही खर्च आता है।
16 अप्रैल के टीटीपी हमले के बाद शुरू हुई व्यवस्था
हंगू जिले में इस प्रकार की सुरक्षा प्रणाली लगाने की जरूरत 16 अप्रैल को सरकी पियाला पुलिस चौकी पर हुए घातक ड्रोन हमले के बाद महसूस हुई। उस दौरान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकियों ने ड्रोन से हमला करने के बाद सुरक्षा बलों पर भारी गोलीबारी की थी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही खैबर पख्तूनख्वा में करीब 341 ड्रोन हमलों को नाकाम किया जा चुका है, जो दर्शाते हैं कि आतंकियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे व्यावसायिक ड्रोन सुरक्षा बलों के लिए कितना बड़ा संकट बन चुके हैं।
विशेषज्ञों ने खड़े किए कारगरता पर सवाल
मछली पकड़ने के जाल वाले इस उपाय पर सुरक्षा विशेषज्ञों ने संदेह व्यक्त किया है। सेंटर फॉर रिसर्च एंड सिक्योरिटी स्टडीज के इम्तियाज गुल के अनुसार, सिर्फ जाल बिछाने से ड्रोन का खतरा समाप्त नहीं होता, क्योंकि हमलों के तरीके, गति और ऊंचाई अलग-अलग हो सकती है। खुद खैबर पख्तूनख्वा पुलिस के अधिकारियों ने भी स्वीकार किया है कि यह जुगाड़ पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है। वास्तविक हमले में यह जाल कितना कारगर साबित होगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
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