Pitru Paksha Mela Mahasangam 2026: बिहार के गयाजी में चल रहे पितृपक्ष मेला महासंगम-2026 में शुक्रवार (02 अक्टूबर, 2026) को आस्था का अनोखा वैश्विक रंग देखने को मिला। रूस, यूक्रेन, जर्मनी, इटली, अफ्रीका और लातविया समेत कई देशों से विदेशी श्रद्धालु अपने मृत पूर्वजों, मित्रों और परिवार के सदस्यों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर गयाजी पहुंचे। उन्होंने देवघाट पर पिंडदान और तर्पण का अनुष्ठान पूरे विधि-विधान से संपन्न किया।
भारतीय परंपरा में रची-बसीं विदेशी महिलाएं
विदेशी श्रद्धालुओं ने पंडितों के मार्गदर्शन में सनातन परंपरा के अनुसार कर्मकांड पूरा किया। इस दौरान विदेशी महिलाएं भारतीय परिधान साड़ी में पिंडदान करती नजर आईं। उनकी श्रद्धा और भारतीय धार्मिक परंपराओं के प्रति समर्पण ने देवघाट पर मौजूद लोगों का ध्यान खींचा।
गयाजी की महत्ता से हुए प्रभावित
विदेशी श्रद्धालुओं के गयाजी पहुंचने की वजह यहां पिंडदान की विशेष धार्मिक मान्यता भी है। बताया गया कि पहले गयाजी आकर पिंडदान कर चुके विदेशी श्रद्धालुओं से प्रेरित होकर इस बार अन्य लोगों ने भी यहां आने का फैसला किया। सनातनधर्मी लोकनाथ गौड़ के नेतृत्व में पहले भी कई विदेशी श्रद्धालु गयाजी पहुंचकर पिंडदान कर चुके हैं।
कई देशों से पहुंचे श्रद्धालु
इस बार पितृपक्ष मेले में रूस, यूक्रेन, जर्मनी, इटली, अफ्रीका और अन्य देशों से श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। इनमें बुजुर्ग महिलाओं से लेकर युवा श्रद्धालु तक शामिल हैं। कई विदेशी श्रद्धालु निर्जला रहकर पिंडदान की परंपरा निभाने की तैयारी भी कर रहे हैं।
रूस से इन श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान
गयाजी पहुंचे विदेशी श्रद्धालुओं में रूस की ब्रिनेवा (68), दूरसुनोवा (42), रेडियोलगा (47), पावलोवा (46), बुरीवाओकसाना (42), गिमडिनोवा (49) और सिफ्टेसिफायना (31) शामिल हैं। इन सभी ने गयाजी में पिंडदान की धार्मिक प्रक्रिया में हिस्सा लिया।
जर्मनी से भी बड़ी संख्या में पहुंचे लोग
जर्मनी से स्वेतलाना (54), थुन (42), सच्चवाब लिडिया (49), कोचनाटालिए (48), मोएलर एउजेंया (52), साईरबोअन्ना (43), मिस्साल इरना (57), कोचनेव तातजाना (49), सचलमकृस्टिना (38) और नेबेलीका (39) ने भी गयाजी पहुंचकर पिंडदान किया।
इटली, यूक्रेन और अफ्रीका के श्रद्धालु भी शामिल
इटली की ओर से बोराच्ची मस्सीमो (68), यूक्रेन की खोमेवको ओइकसान्द्रा (39) और कुरिलोवा नतासिआ (66) ने पिंडदान किया। वहीं घाना-अफ्रीका के माइकल मनसो (52) और असमोह (54) तथा लातविया की वी. अपुसिंस्का (55) ने भी गयाजी पहुंचकर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान पूरा किया।
गयाजी में दिखी सनातन परंपरा की वैश्विक पहुंच
पितृपक्ष के दौरान अलग-अलग देशों से विदेशी श्रद्धालुओं का गयाजी पहुंचना यह दिखाता है कि यहां होने वाले पिंडदान और तर्पण को लेकर विदेशों में भी लोगों की धार्मिक रुचि बढ़ रही है। देवघाट पर विदेशी श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने पितृपक्ष मेला महासंगम-2026 को एक अलग वैश्विक पहचान भी दी है।
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