राजधानी दिल्ली में इस साल मॉनसून के दौरान 576.9 मिलीमीटर की भारी बारिश दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद दिल्लीवासियों को साफ हवा नसीब नहीं हो सकी। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की नई स्टडी के मुताबिक, 1 जून से 31 अगस्त 2026 तक मॉनसून के 92 दिनों में से सिर्फ 9 जुलाई का एक अकेला दिन ऐसा रहा जब दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स ‘गुड’ श्रेणी में दर्ज किया गया। कुल 92 दिनों में से 53 दिन हवा की गुणवत्ता ‘मॉडरेट’ श्रेणी में रही, जो राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों से अधिक है।
बारिश रुकते ही 48 घंटे में 38 फीसदी बढ़ा प्रदूषण
सीएसई के अध्ययन के अनुसार, बारिश के दौरान हवा में मौजूद धूल और छोटे कण (PM2.5) अस्थाई रूप से जरूर कम हुए, लेकिन पानी थमते ही प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ गया। बारिश के दौरान औसत PM2.5 घटकर 32.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया था, लेकिन बारिश बंद होने के 24 घंटे बाद यह 36.2 और 48 घंटे बाद उछलकर 45.1 माइक्रोग्राम पर पहुंच गया। यानी बारिश रुकने के दो दिनों के भीतर प्रदूषण में 37.9 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी देखी गई।
101 मिमी बारिश वाले दिन भी नहीं मिली ‘गुड’ एयर क्वालिटी
अध्ययन से सामने आया कि 8 अगस्त को मॉनसून की सबसे ज्यादा 101.05 मिमी एकदिवसीय बारिश हुई थी, लेकिन उस दिन भी दिल्ली की एयर क्वालिटी ‘गुड’ न होकर केवल ‘सैटिस्फैक्टरी’ ही दर्ज हो सकी। मॉनसून के 92 दिनों में 53 दिन ‘मॉडरेट’, 35 दिन ‘सैटिस्फैक्टरी’, 3 दिन ‘पुअर’ और केवल 1 दिन ‘गुड’ हवा रही। वहीं अप्रैल और मई के 61 दिनों में एक भी दिन हवा साफ नहीं रही थी, जिसमें 38 दिन हवा मॉडरेट और 17 दिन पुअर श्रेणी में थी।
बारिश के बाद जहरीली गैसों ने बढ़ाई दिल्ली की चिंता
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बारिश केवल धूल कणों को नीचे बिठा पाती है, जबकि गाड़ियों, कारखानों और डीजल जनरेटरों से निकलने वाली नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ($NO_2$), कार्बन मोनोऑक्साइड ($CO$) और ग्राउंड लेवल ओजोन जैसी गैसें बारिश के बाद भी हवा में बनी रहती हैं। धूप निकलते ही इन गैसों के बीच केमिकल रिएक्शन होता है, जिससे ग्राउंड लेवल ओजोन का निर्माण होता है। मॉनसून के 20 दिनों में ओजोन और 10 दिनों में $NO_2$ प्रमुख प्रदूषक रहे।
सर्दियों से पहले आपातकालीन नहीं, स्थाई समाधान की जरूरत
सीएसई ने आगाह किया है कि आने वाली सर्दियों में हवा की गति धीमी होने के कारण दिल्ली-एनसीआर की स्थिति और बिगड़ेगी। संस्था का कहना है कि सर्दियों में केवल आपातकालीन कदम उठाने के बजाय पूरे साल गाड़ियों, निर्माण कार्यों, औद्योगिक कचरे और जनरेटरों से होने वाले उत्सर्जन को रोकने के लिए पूरे दिल्ली-एनसीआर में एक साथ दीर्घकालिक नीतियां लागू करनी होंगी।
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