अब तक AI से कोई काम कराने के लिए यूजर को हर चरण पर निर्देश देना पड़ता था। सवाल पूछिए, जवाब लीजिए और फिर अगला सवाल कीजिए। OpenAI अब इस तरीके को बदलने की दिशा में Dots नाम के AI एजेंट लेकर आया है। इन्हें इस तरह डिजाइन किया गया है कि यूजर एक बार काम या लक्ष्य समझाए और उसके बाद Dots जरूरी अगले कदम खुद तय करते हुए काम आगे बढ़ाता रहे। जरूरत पड़ने पर यह यूजर से राय या मंजूरी भी मांग सकता है।
Chatbot नहीं, काम संभालने वाला AI एजेंट
OpenAI के मुताबिक Dots उन प्रोजेक्ट्स के लिए बनाए गए हैं जो एक ही जवाब से खत्म नहीं होते। हर Dot को क्लाउड कंप्यूटर और ब्राउजर उपलब्ध कराया जाता है। यह जुड़े ऐप्स का इस्तेमाल कर सकता है, जानकारी तलाश सकता है, दस्तावेज तैयार कर सकता है और यूजर के ChatGPT से बाहर जाने के बाद भी दिए गए काम पर आगे बढ़ सकता है। मिसाल के तौर पर किसी रिपोर्ट पर काम करते समय Dot अलग-अलग स्रोतों से नई जानकारी जुटाकर विश्लेषण अपडेट कर सकता है। जहां फैसला लेने के लिए यूजर की जरूरत होगी, वहां वह वापस आकर मंजूरी मांग सकता है। यानी हर छोटी गतिविधि के लिए अलग कमांड देने की जरूरत कम हो जाती है।
4,000 से ज्यादा ऐप्स से कनेक्शन
Dots की एक अहम क्षमता इसका ऐप्स के साथ जुड़कर काम करना है। OpenAI के अनुसार यह 4,000 से ज्यादा ऐप्स के कनेक्शन को सपोर्ट करता है। इसे ChatGPT के अलावा Slack और Microsoft Teams जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। टेक्स्ट मैसेजिंग का विकल्प भी आगे उपलब्ध कराने की बात कही गई है। कंटेंट क्रिएटर्स के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। OpenAI के उदाहरण के मुताबिक कोई Dot इंटरव्यू की ट्रांसक्रिप्ट से जरूरी हिस्से निकालकर शो नोट्स और सोशल मीडिया पोस्ट के ड्राफ्ट तैयार कर सकता है। यूजर के बदलाव और पसंद को आगे के काम में इस्तेमाल करने की क्षमता भी इसमें बताई गई है।
AI को कितनी आजादी मिलेगी
Dots को पूरी तरह अनियंत्रित तरीके से काम करने की अनुमति नहीं है। यूजर तय कर सकता है कि एजेंट किन ऐप्स तक पहुंच सकता है और उसे कितनी अनुमति मिलेगी। संवेदनशील गतिविधियों में यूजर का नियंत्रण बना रहता है। OpenAI के अनुसार पासवर्ड बदलने जैसे कामों के लिए अतिरिक्त नियंत्रण रखा गया है। इसके लिए Custom Rules का विकल्प भी दिया गया है। यूजर तय कर सकता है कि कौन-सा काम Dot अपने आप करेगा, किस काम पर पहले मंजूरी लेगा और किन गतिविधियों को बिल्कुल नहीं करेगा। यह व्यवस्था इसलिए अहम है क्योंकि ईमेल, फाइलों और दूसरे ऐप्स तक AI की पहुंच सुविधा के साथ सुरक्षा और प्राइवेसी से जुड़े सवाल भी पैदा करती है।
इसी क्षेत्र में Meta भी अपने Muse AI एजेंट को आगे बढ़ा रही है। ऐसे में AI कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा अब सिर्फ बेहतर जवाब देने वाले चैटबॉट तक सीमित नहीं रह गई है। फोकस ऐसे AI सिस्टम पर बढ़ रहा है जो यूजर के लक्ष्य को समझकर लंबे समय तक उसके लिए काम आगे बढ़ा सकें।
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