Saint Premanand Maharaj Disciple Rasik Dulari Sharan Death: संत प्रेमानंद महाराज के शिष्य बताए जा रहे रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोधी की मौत के पांच दिन बाद भी कई सवालों के जवाब नहीं मिल सके हैं। 25 सितंबर 2026 को वृंदावन के गुरु कृपा कुंज अपार्टमेंट की चौथी मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हुई थी। शुरुआती जांच में पुलिस इसे आत्महत्या से जोड़कर देख रही है, लेकिन परिवार ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
CCTV में दिखा पूरा मामला
पुलिस के अनुसार, 25 सितंबर की सुबह करीब 10:25 बजे दीपक कमरे से निकलते दिखाई दिए। इसके बाद वह अपार्टमेंट की चौथी मंजिल की छत तक पहुंचे और करीब 10:36 बजे नीचे गिर गए। गंभीर हालत में उन्हें सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घटना से जुड़े CCTV फुटेज को पुलिस जांच का अहम हिस्सा मान रही है।
कमरे से बरामद हुआ ग्राइंडर
जांच के दौरान दीपक के कमरे से इलेक्ट्रिक टाइल्स ग्राइंडर मिलने की बात सामने आई। पुलिस इस उपकरण और कमरे में मिले अन्य साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच करा रही है। शरीर पर गंभीर चोटों के कारणों और घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने के लिए पुलिस हर पहलू की पड़ताल कर रही है।
पोस्टमार्टम में कई गंभीर चोटें
29 सितंबर को सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह अत्यधिक रक्तस्राव से हुआ Hemorrhagic Shock बताई गई। रिपोर्ट में सिर, पसलियों और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटों तथा अंदरूनी क्षति का उल्लेख है। पुलिस इन चोटों को घटना के पूरे क्रम से जोड़कर देख रही है।
परिवार ने उठाए कई सवाल
परिजनों के मुताबिक, उन्हें फोन पर दीपक के गिरने और गंभीर हालत में अस्पताल में होने की जानकारी मिली थी। परिवार जबलपुर से वृंदावन पहुंचा। परिजनों का आरोप है कि उन्हें घटना की पूरी जानकारी समय पर नहीं दी गई और आश्रम पहुंचने के बाद भी उन्हें काफी देर तक स्पष्ट जानकारी का इंतजार करना पड़ा। इन आरोपों पर उपलब्ध इनपुट में आश्रम की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं है।
परिवार को आत्महत्या की आशंका नहीं थी
परिजनों का कहना है कि उन्हें दीपक के व्यवहार से ऐसा नहीं लगा था कि वह अपनी जान लेने जैसा कदम उठा सकते हैं। परिवार ने उसके पुराने संपर्क, बातचीत, मोबाइल चैट और डायरी समेत सभी संभावित साक्ष्यों की जांच की मांग की है। परिवार का यह भी कहना है कि समय के साथ दीपक से उनका संपर्क काफी सीमित हो गया था।
कौन थे रसिक दुलारी शरण?
दीपक लोधी मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। परिवार के अनुसार, नर्मदा परिक्रमा के बाद वह वृंदावन आए और संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े। दीक्षा के बाद उन्हें रसिक दुलारी शरण नाम से जाना जाने लगा। रिपोर्टों के अनुसार, वह करीब दो वर्षों से वृंदावन में रह रहे थे।
मोबाइल और DVR की भी जांच
पुलिस ने अपार्टमेंट का DVR, मोबाइल फोन, रक्त के नमूने और अन्य साक्ष्य फोरेंसिक जांच के लिए भेजे हैं। मोबाइल में मौजूद चैट और दूसरे डिजिटल डेटा से घटना से पहले की परिस्थितियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस डायरी और अन्य सामान को भी जांच में शामिल कर रही है।
संत समाज ने भी मांगी जांच
घटना के बाद वृंदावन के संत समाज की ओर से भी उच्च स्तरीय जांच की मांग उठी है। संतों का कहना है कि घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौत की परिस्थितियां क्या थीं। कुछ संतों ने SIT या अन्य स्वतंत्र जांच की मांग की है।
CBI जांच की मांग तेज
दीपक के परिवार ने CBI जांच की मांग की है। वहीं, SIT या स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। फिलहाल पुलिस शुरुआती तौर पर आत्महत्या के एंगल से जांच कर रही है, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों और परिवार की शिकायत के आधार पर दूसरे पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
अब किन सवालों के जवाब जरूरी
जांच का फोकस इस बात पर है कि दीपक के कमरे से निकलने से पहले क्या हुआ, चोटें किन परिस्थितियों में आईं और उसके बाद घटनाक्रम किस तरह आगे बढ़ा। CCTV, मोबाइल डेटा, DVR, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर परिवार और संत समाज की मांग के बीच पुलिस जांच जारी है।
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