दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने तीन भारतीय यात्रियों के सामान से 10 हाई-एंड ड्रोन बरामद किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, इन ड्रोन की कुल कीमत 1,03,55,900 रुपये है। जांच में इन्हें प्रोफेशनल ग्रेड का बताया गया है और इनमें थर्मल इमेजिंग तथा लेजर रेंज फाइंडर जैसी क्षमताएं पाई गई हैं। यात्री इन्हें हांगकांग से वियतनाम के रास्ते भारत लेकर पहुंचे थे।
ग्रीन चैनल पर रोके गए तीन यात्री
दिल्ली कस्टम्स (एयरपोर्ट एंड जनरल) ने मंगलवार को X के जरिए बरामदगी की जानकारी साझा की। अधिकारियों के अनुसार, तीनों यात्री 25 सितंबर को वियतनाम के रास्ते हांगकांग से दिल्ली एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पहुंचे थे। खुफिया सूचना के आधार पर कस्टम अधिकारियों ने यात्रियों को ग्रीन चैनल पार करते समय रोक लिया। सामान की विस्तृत तलाशी में 10 ड्रोन मिले। इनके साथ कंट्रोलर, कैमरों वाले गिम्बल, केबल, प्रोपेलर और जॉयस्टिक समेत कई उपकरण भी बरामद किए गए।
थर्मल कैमरा और लेजर रेंज फाइंडर से लैस
कस्टम विभाग के मुताबिक, चार्टर्ड इंजीनियर से कराए गए तकनीकी मूल्यांकन में ड्रोन को प्रोफेशनल ग्रेड का पाया गया। इनमें थर्मल इमेजिंग और लेजर रेंज फाइंडर की सुविधा मौजूद होने की बात सामने आई है। अधिकारियों ने इन्हें मिलिट्री या डिफेंस ग्रेड यूएवी की श्रेणी का बताया है। कस्टम विभाग के अनुसार, इस तरह के ड्रोन के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) में पंजीकरण जरूरी होता है। मामले में यात्रियों को हिरासत में लिया गया है और सामान की जांच जारी है। कार्रवाई कस्टम्स एक्ट, 1962 के तहत की जा रही है।
ड्रोन किस मकसद से लाए गए
फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इतनी बड़ी संख्या में हाई-एंड ड्रोन भारत लाने का उद्देश्य क्या था। अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इन्हें किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को सप्लाई किया जाना था या तीनों यात्री इन्हें निजी इस्तेमाल के लिए लेकर आए थे। कस्टम अधिकारी ड्रोन की खरीद, उनके दस्तावेज, यात्रा और सामान से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन ड्रोन को भारत लाने के पीछे क्या मकसद था और इस मामले में आगे किन लोगों की भूमिका सामने आती है।
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