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किसान परिवार से सेना के हवलदार तक… अब एशियन गेम्स में मेडल किया पक्का, कौन हैं बॉक्सर अंकुश पंघाल?

Asian Games 2026: भारतीय मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों के 80 किग्रा वर्ग के क्वार्टर फाइनल में ताजिकिस्तान के नेक्रुज सलीमोव को 5-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। इस जीत के साथ अंकुश ने भारत के लिए बॉक्सिंग में पदक पक्का कर दिया है। वह इस एशियन गेम्स में भारत का पहला बॉक्सिंग मेडल सुनिश्चित करने वाले मुक्केबाज बने हैं।

80 किग्रा वर्ग में दिखाया दम

अंकुश ने इससे पहले एशियन गेम्स के 80 किग्रा वर्ग में बहरीन के हम्सा वोगेल को भी 5-0 से हराया था। अब सलीमोव के खिलाफ भी उन्होंने सर्वसम्मत 5-0 का फैसला अपने नाम किया। एशियन गेम्स में पदक पक्का करने के बाद उनकी नजर अब अगले मुकाबले और स्वर्ण पदक पर है।

11 साल की उम्र में शुरू की बॉक्सिंग

13 अगस्त 2005 को हरियाणा में जन्मे अंकुश ने महज 11 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू की थी। कम उम्र से ही उन्होंने लगातार मेहनत की और धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बनाई। 2025 में ग्रेटर नोएडा में हुए वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में उन्होंने 80 किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता था।

कॉमनवेल्थ में जीता गोल्ड

अंकुश की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स का स्वर्ण पदक भी शामिल है। ग्लासगो में पुरुषों के 80 किग्रा फाइनल में उन्होंने इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू को 4-1 से हराकर गोल्ड मेडल जीता। इस उपलब्धि की पुष्टि प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में भी की गई है।

कबड्डी से शुरू हुआ खेल सफर

बॉक्सिंग से पहले अंकुश कबड्डी खेलते थे और जिला/राज्य स्तर पर भी उन्होंने सफलता हासिल की थी। बाद में पिता सुरेश पंघाल की सलाह पर उन्होंने कबड्डी छोड़कर बॉक्सिंग को अपना खेल बनाया। शुरुआत में गांव के लोगों ने उनके इस फैसले का मजाक भी उड़ाया, लेकिन उन्होंने प्रशिक्षण जारी रखा और 14 साल की उम्र में स्कूली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीत लिया।

सेना में बने हवलदार

अंकुश का खेल करियर भारतीय सेना से भी जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक वह 2024 में सेना में हवलदार बने। 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में 80 किग्रा बॉक्सिंग का स्वर्ण जीतने वाले सेना के खिलाड़ियों में भी उनका नाम शामिल रहा।

परिवार में खेल की मजबूत परंपरा

अंकुश हरियाणा के हिसार जिले के भेरिया गांव से आते हैं और उनका परिवार खेलों से जुड़ा रहा है। उनके पिता सुरेश पंघाल पूर्व राष्ट्रीय स्तर के कबड्डी खिलाड़ी हैं और होटल का संचालन करते हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी खेलों से जुड़े रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में पंघाल परिवार को किसान परिवार की पृष्ठभूमि वाला बताया गया है।

अब गोल्ड पर नजर

कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने के बाद अंकुश ने एशियन गेम्स में भी शानदार शुरुआत की है। अब क्वार्टर फाइनल में सलीमोव को हराकर उन्होंने पदक पक्का कर लिया है। एशियन गेम्स के सेमीफाइनल में पहुंच चुके अंकुश के लिए अगला लक्ष्य पदक का रंग बदलना होगा।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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