शीतकाल से पहले ही दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में वायु प्रदूषण ने खतरनाक रूप ले लिया है। इंडोनेशिया के जंगलों में लगी आग का जहरीला धुआं अब रिहायशी इलाकों तक फैल चुका है, जिससे आसमान में जहरीली धुंध की चादर छा गई है। हालात इतने विकट हो चुके हैं कि लोगों को सांस लेने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, शिक्षण संस्थान बंद करने पड़े हैं और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस गंभीर संकट ने सांस के मरीजों और बुजुर्गों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।
ऑक्सीजन सिलेंडर और कंसंट्रेटर की बिक्री में 35% की भारी वृद्धि
प्रदूषित हवा के कारण लोगों को घर पर ही सांस लेने के लिए कृत्रिम ऑक्सीजन का सहारा लेना पड़ रहा है। मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर के बाहरी इलाके में स्थित मेडिकल उपकरण कंपनी ‘AA Alive’ के अनुसार, ऑक्सीजन उपकरणों की मांग में 35 प्रतिशत का उछाल आया है। कंपनी मरीजों को तीन घंटे तक चलने वाले ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ-साथ करीब 24 घंटे तक बैकअप देने वाले ऑक्सीजन कंसंट्रेटर उपलब्ध करा रही है। अस्पताल से लंबे समय बाद लौटे 69 वर्षीय मोहम्मद नूर बिन बुजांग जैसे मरीजों के लिए यह जीवन रक्षा का मुख्य साधन बन गया है।
प्रदूषित हवा से तेजी से खराब हो रहे मशीनों के फिल्टर
हवा में मौजूद भारी प्रदूषक तत्व न केवल इंसानी फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि स्वास्थ्य उपकरणों के रखरखाव का खर्च भी बढ़ा रहे हैं। युवा टेक्नीशियन मुबास्सर खान ने बताया कि आमतौर पर एक हजार घंटे चलने वाले ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के फिल्टर इस जहरीले धुएं के कारण अपनी आधी अवधि में ही खराब हो रहे हैं। इसके बावजूद मांग इतनी अधिक है कि कंपनी प्रतिदिन करीब 40 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर किराये पर देने के लिए मजबूर है।
घरों को सुरक्षित रखने के लिए एयर प्यूरीफायर की मांग नौ गुना बढ़ी
सांस के उपकरणों के साथ-साथ घरों के भीतर की हवा को शुद्ध करने वाली मशीनों की मांग में भी अभूतपूर्व तेजी आई है। क्षेत्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स विक्रेता ‘कोर्ट्स’ के आंकड़ों के मुताबिक, 28 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच एयर प्यूरीफायर की बिक्री पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 600 प्रतिशत तक बढ़ गई है। वहीं, सिंगापुर की प्रमुख कंपनी ‘Gain City’ ने बताया कि धुंध के मौसम की शुरुआत के बाद से मांग में लगातार इजाफा हुआ है और हाल के हफ्तों में यह नौ गुना तक पहुंच चुकी है, जो बढ़ते पर्यावरण संकट के बीच लोगों की बढ़ती चिंता को साफ दर्शाता है।
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