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दुनिया में बदलने लगा महाशक्तियों का समीकरण! दिल्ली से जयशंकर ने दिया अमेरिका-चीन को कड़ा संदेश

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बदलते वैश्विक परिदृश्य और महाशक्तियों के आपसी समीकरणों को लेकर एक बेहद सटीक और कड़ा कूटनीतिक विश्लेषण पेश किया है।

नई दिल्ली में आयोजित ‘म्यूनिख लीडर्स मीटिंग’ के मंच से संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि आज का अंतरराष्ट्रीय माहौल मुख्य रूप से अमेरिका के रुख में आए बुनियादी बदलाव से तय हो रहा है। जयशंकर ने साफ तौर पर कहा कि वाशिंगटन का यह फैसला किसी मजबूरी का नतीजा नहीं है, बल्कि यह उसकी अपनी सोची-समझी रणनीति और ‘पसंद’ का परिणाम है। उनके अनुसार, अपनी प्राथमिकताओं को नए सिरे से तय करने के इस फैसले के कारण अमेरिका अब जान-बूझकर एक ऐसी महाशक्ति के रूप में उभर रहा है, जो पहले की तुलना में कहीं अधिक अकेली नजर आ रही है।

चीन का उदय और उसकी ‘अनोखी’ सोच

विदेश मंत्री ने तेजी से बदलते ग्लोबल ऑर्डर की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण विशेषता के रूप में चीन के उभार को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि चीन खुद को दुनिया में एक “अनोखा देश” मानता है। जयशंकर के मुताबिक, यह न केवल चीन की अपनी सोच है, बल्कि कई मायनों में आज का वैश्विक परिदृश्य और जमीनी सच्चाई भी इस बात की पुष्टि करती है। चीन का यह बढ़ता प्रभाव अंतरराष्ट्रीय शक्ति संतुलन के नए आयाम तय कर रहा है।

अमेरिका-चीन से आगे पहुंची वैश्विक प्रतिस्पर्धा

जयशंकर ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच जारी मुकाबला अब केवल अमेरिका और चीन के द्वंद्व तक ही सीमित नहीं रह गया है। आज का दौर बेहद कड़ी प्रतिस्पर्धा का है, जहां विभिन्न देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़त हासिल करने के लिए अपने पास मौजूद हर तरह के प्रभाव, संसाधन और ताकत को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि देशों के बीच गहरे आर्थिक और राजनीतिक जुड़ाव के बावजूद रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता का ग्राफ तेजी से ऊपर जा रहा है।

क्या है म्यूनिख लीडर्स मीटिंग?

गौरतलब है कि म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस द्वारा आयोजित की जाने वाली इस बैठक में दुनिया भर से लगभग 80 वरिष्ठ नीति-निर्माता और सुरक्षा विशेषज्ञ शिरकत करते हैं। साल में एक या दो बार अंतरराष्ट्रीय राजधानियों में होने वाली ये बैठकें बंद दरवाजों के पीछे आयोजित की जाती हैं। इनमें ‘चैथम हाउस नियम’ का पालन किया जाता है, ताकि वैश्विक सुरक्षा और कूटनीति के संवेदनशील विषयों पर विशेषज्ञ और रणनीतिकार बिना किसी दबाव के खुलकर अपने विचार साझा कर सकें।

 

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