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खुद कंगाली की कगार पर, चले दूसरों को बचाने! जानिए तुर्की-पाकिस्तान के ‘कागज़ी शेर’ बनने का पूरा गणित

सऊदी अरब पर यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा तेज किए गए हमलों के बाद सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के शीर्ष रक्षा अधिकारियों ने रियाज़ में एक आपात बैठक की। इस दौरान तीनों देशों ने रियाज़ के समक्ष मौजूद सुरक्षा चुनौतियों का गहन आकलन किया और ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ के तहत सऊदी अरब की सुरक्षा, संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता की सामूहिक रक्षा करने के दृढ़ संकल्प को दोहराया।

नागरिकों और बुनियादी ढांचों पर हमलों पर गहरा आक्रोश

बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में अधिकारियों ने मक्का, आम नागरिकों और महत्वपूर्ण आर्थिक बुनियादी ढाँचों को निशाना बनाकर किए जा रहे हूती हमलों की तीखी निंदा की। तीनों देशों ने पवित्र स्थलों और असैन्य क्षेत्रों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करते हुए संकट की इस घड़ी में सऊदी सशस्त्र बलों की त्वरित मुस्तैदी और जवाबी प्रतिक्रिया की सराहना की।

इंटेलिजेंस शेयरिंग और सैन्य क्षमताओं का होगा एकीकरण

बैठक के दौरान तीनों देशों की सेनाओं के बीच रणनीतिक साझेदारी को व्यावहारिक धरातल पर उतारने पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके तहत खुफिया इनपुट साझा करने, आपसी सैन्य समन्वय बढ़ाने और तीनों देशों की सैन्य क्षमताओं को एक साथ एकीकृत करने के तरीकों पर सहमति बनी, ताकि किसी भी संभावित खतरे से तुरंत निपटा जा सके।

कूटनीतिक वार्ताओं के बाद तुरंत प्रभावी सैन्य कदम

पाकिस्तानी सेना ने स्पष्ट किया कि रियाज़ की यह बैठक उनकी रक्षा साझेदारी की मजबूती और ‘मक्का समझौते’ की शर्तों को तुरंत प्रभावी सैन्य सहयोग में बदलने के साझे संकल्प को दर्शाती है। यह सैन्य बैठक न्यूयॉर्क में तीनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई वार्ता के ठीक एक दिन बाद आयोजित की गई। गौरतलब है कि पिछले महीने हुए मक्का समझौते के तहत यह नियम तय किया गया है कि किसी भी एक सदस्य देश पर हुआ हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा।

 

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