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ट्रंप की परमाणु डील से मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव! सऊदी-अमेरिका समझौते पर इजराइल की क्यों बढ़ी टेंशन?

US-Saudi Nuclear Agreement: अमेरिका और सऊदी अरब के बीच असैन्य परमाणु सहयोग को लेकर अहम समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत अमेरिका सऊदी अरब को बिजली उत्पादन के लिए असैन्य परमाणु तकनीक उपलब्ध कराएगा। इसे सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। हालांकि इस समझौते को लेकर इजरायल और अमेरिका के कई अधिकारियों के साथ-साथ परमाणु अप्रसार विशेषज्ञों ने गंभीर चिंताएं भी जताई हैं।

ट्रंप ने रखी इजरायल से जुड़ी शर्त

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि सऊदी अरब के साथ हुए इस असैन्य परमाणु समझौते को अंतिम मंजूरी तभी मिलेगी, जब सऊदी अरब अब्राहम संधि के तहत इजरायल के साथ अपने संबंध सामान्य करेगा। ट्रंप ने इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा, ‘इस समझौते को मंजूरी मिल जाएगी, लेकिन यह पूरी तरह से सऊदी अरब के अब्राहम समझौते में शामिल होने पर निर्भर है।’

यूरेनियम बढ़ाने की अनुमति नहीं

ट्रंप ने अपने पोस्ट में स्पष्ट किया कि इस समझौते के तहत सऊदी अरब को यूरेनियम बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका असैन्य परमाणु संयंत्रों के खिलाफ नहीं है। इसके बावजूद परमाणु एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस समझौते में ऐसे पर्याप्त सुरक्षा प्रावधान नहीं हैं, जो भविष्य में परमाणु सामग्री को हथियार बनाने योग्य स्तर तक बढ़ने से पूरी तरह रोक सकें।

इजरायल की बढ़ी चिंता

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल समेत अमेरिका के कई अधिकारियों और न्यूक्लियर एक्सपर्ट्स ने इस समझौते का विरोध किया था। उनका मानना है कि यदि भविष्य में सऊदी अरब को यूरेनियम बढ़ाने से जुड़ी तकनीकी क्षमता मिलती है, तो वह परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। इससे पूरे मिडिल ईस्ट में परमाणु हथियारों की नई होड़ शुरू होने का खतरा बढ़ सकता है।

सऊदी ने भी रखी अपनी शर्त

दूसरी ओर, सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि वह इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने से पहले फिलिस्तीन की स्थापना के लिए स्पष्ट और ठोस रास्ता चाहता है। यानी ट्रंप की शर्त और सऊदी की मांग के बीच अभी भी बड़ा कूटनीतिक अंतर बना हुआ है।

संसद की मंजूरी अभी बाकी

बुधवार को घोषित इस समझौते को लागू करने के लिए अमेरिकी संसद की मंजूरी भी जरूरी होगी। ऐसे में इस डील के अंतिम रूप लेने से पहले अमेरिकी कानून की सहमति अहम भूमिका निभाएगी।

इजरायल को हथियारों की होड़ का डर

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुए इस परमाणु समझौते को लेकर इजरायल को आशंका है कि पश्चिम एशिया में परमाणु हथियारों की नई जंग शुरू हो सकती है। हालांकि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके रक्षा व विदेश मंत्रियों ने अब तक इस समझौते पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। वहीं आलोचकों का कहना है कि यह समझौता इजरायल के सुरक्षा हितों को प्रभावित कर सकता है।

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Yogita Tyagi
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योगिता त्यागी एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, मनोरंजन, धर्म और लाइफस्टाइल विषयों में विशेष रुचि है। वर्तमान में वह Mhone News के राजनीतिक, धर्म और मनोरंजन सेक्शन के लिए सक्रिय रूप से लेखन कर रही हैं। डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने अपने करियर में कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों- जैसे दैनिक भास्कर, पंजाब केसरी, इंडिया डेली लाइव और ITV नेटवर्क में योगदान दिया है। योगिता ने गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (GGSIPU) से मास कम्युनिकेशन और जर्नलिज्म में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है, जिसने उनके डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में गहन, प्रभावशाली और विश्वसनीय लेखन की मजबूत नींव रखी है।
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