Leopardus Tilcayo: बोलीविया के बादलों से ढके युंगास के पहाड़ी जंगलों में वैज्ञानिकों ने जंगली बिल्ली की एक ऐसी प्रजाति की पहचान की है, जिसे अब तक विज्ञान अलग प्रजाति के तौर पर नहीं जानता था। करीब 46 सेंटीमीटर लंबी और केवल 1.4 किलोग्राम वजनी यह बिल्ली सामान्य घरेलू बिल्ली से भी छोटी है। वैज्ञानिकों ने इसे Leopardus Tilcayo नाम दिया है। इसकी खासियत सिर्फ इसका छोटा आकार नहीं, बल्कि इसका लाखों साल पुराना अलग आनुवंशिक इतिहास है।
एक सदी से ज्यादा बाद नई बिल्ली की पहचान
शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह बिल्ली टाइगर कैट समूह से संबंधित है। वैज्ञानिकों ने बताया कि एक सदी से ज्यादा समय बाद पहली बार किसी जीवित नई बिल्ली प्रजाति को औपचारिक रूप से नाम देकर वैज्ञानिक रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। स्थानीय स्तर पर इसे तिलकायो नाम से जाना जाता है। इसका शरीर हल्के भूरे रंग का है और उस पर अनियमित आकार के रोसेट यानी फूल जैसी गोलाकार धारियां दिखाई देती हैं।
10 साल का बिल्ला बना खोज का अहम हिस्सा
इस खोज में सबसे दिलचस्प भूमिका 10 साल के एक नर तिलकायो की रही। शोध में शामिल दो जीवित बिल्लियों में से यह नर पहले एक स्थानीय परिवार के घर में रहता था। परिवार इसे सामान्य जंगली या घरेलू बिल्ली समझकर पाल रहा था। फिलहाल इसे सेंदा वर्दे वन्यजीव अभयारण्य में रखा गया है। वैज्ञानिकों की नजर तब इस पर गई, जब इसकी शारीरिक बनावट पहले से पहचानी गई टाइगर कैट प्रजातियों से पूरी तरह मेल नहीं खा रही थी।
शरीर की बनावट ने वैज्ञानिकों को किया सतर्क
बिल्ली की अलग शारीरिक विशेषताओं ने शोधकर्ताओं को इसकी पहचान पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर किया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने केवल बाहरी रूप के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय आनुवंशिक स्तर पर इसकी जांच शुरू की। DNA विश्लेषण ने इस बिल्ली के बारे में वैज्ञानिकों की समझ को पूरी तरह बदल दिया और इसके अलग विकासवादी इतिहास का पता चला।
38 बिल्लियों के DNA की हुई जांच
शोधकर्ताओं ने दक्षिण अमेरिका के अलग-अलग देशों से कुल 38 बिल्लियों के आनुवंशिक नमूनों का विश्लेषण किया। इस अध्ययन में संग्रहालयों में सुरक्षित रखे गए 8 नमूने भी शामिल थे। इन नमूनों की आनुवंशिक तुलना से पता चला कि जिस टाइगर कैट समूह को पहले एक ही प्रजाति माना जाता था, उसके भीतर वास्तव में 5 अलग आनुवंशिक प्रजातियां मौजूद हैं। इनमें बोलीविया की तिलकायो भी शामिल है।
14 लाख साल पहले अलग हुई थी वंशावली
DNA अध्ययन से सामने आया कि तिलकायो की वंशावली करीब 14 लाख साल पहले बाकी टाइगर कैट से अलग हो गई थी। इसका मतलब है कि यह बिल्ली लाखों वर्षों से अपनी अलग आनुवंशिक पहचान के साथ मौजूद थी, लेकिन वैज्ञानिक समुदाय को इसकी स्वतंत्र प्रजाति होने की जानकारी अब मिली है।
छोटी बिल्ली, लेकिन वैज्ञानिक खोज बड़ी
तिलकायो का वजन सिर्फ 1.4 किलोग्राम और लंबाई करीब 46 सेंटीमीटर है, लेकिन इसकी खोज दक्षिण अमेरिका की जैव विविधता को समझने के लिहाज से अहम मानी जा रही है। एक ऐसी बिल्ली, जो वर्षों तक इंसानों के बेहद करीब रह चुकी थी, उसके DNA ने यह दिखा दिया कि प्रकृति में मौजूद प्रजातियों की वास्तविक विविधता अभी भी पूरी तरह सामने नहीं आई है।
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