दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने कैंपस में हो रही हिंसा, हुड़दंग और नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि अगर छात्रों और छात्र संगठनों का व्यवहार इसी तरह जारी रहा, तो चुनाव की पूरी प्रक्रिया रद्द करने का आदेश भी दिया जा सकता है। कोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस से हालात पर नियंत्रण को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा है।
‘अब बहुत हो चुका’, कोर्ट ने जताई नाराजगी
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने चुनाव के दौरान सामने आई घटनाओं पर नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, “अब बहुत हो चुका (इनफ इज इनज)। हम इस तरह के आपराधिक व्यवहार, लापरवाही और गुंडागर्दी को कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते।” पीठ ने यह भी कहा कि हर साल छात्रसंघ चुनाव के दौरान ऐसी घटनाएं सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। अदालत के मुताबिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के नाम पर कानून और व्यवस्था से समझौता नहीं किया जा सकता।
16 सितंबर को नॉर्थ कैंपस में हुई झड़प
डूसू चुनाव प्रचार के दौरान 16 सितंबर को नॉर्थ कैंपस में दो छात्र गुटों के बीच हाथापाई की घटना सामने आई थी। इसके अलावा कैंपस में वाहनों के काफिले निकालने, गाड़ियों से स्टंट करने और पोस्टर लगाकर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं। इन घटनाओं के चलते दिल्ली विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव के दौरान तय नियमों के पालन को लेकर सवाल उठे हैं। हाईकोर्ट ने इन घटनाओं को चुनावी प्रक्रिया की गंभीरता से जोड़ते हुए प्रशासन की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया।
कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुई कोर्ट तो मतगणना पर भी रोक
हाईकोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस यह भरोसा दिलाने में विफल रहे कि ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी, तो अदालत चुनाव प्रक्रिया को निरस्त करने का आदेश दे सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कार्रवाई संतोषजनक नहीं होने पर वोटों की गिनती और नतीजों की घोषणा पर रोक लगाने का कदम उठाया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र को आपराधिक गतिविधियों का माध्यम नहीं बनने दिया जा सकता। अगली सुनवाई में विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस को अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला होगा।
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