Trump UNGA Speech: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 22 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने ईरान के परमाणु प्रोग्राम, होर्मुज, अमेरिकी अर्थव्यवस्था और सीमाओं से लेकर वेनेजुएला, क्यूबा, ग्रीनलैंड, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत और संयुक्त राष्ट्र में सुधार जैसे कई मुद्दों पर बात की।
ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे
ईरान पर बोलते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका उसे परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने ईरान के साथ मौजूदा टकराव और उसके परमाणु बनाने को लेकर अमेरिकी कार्रवाई का बचाव किया। ट्रंप ने ईरान पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने और आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन करने के आरोप भी लगाए।
मिडटर्म चुनाव के बाद समझौते की उम्मीद
ट्रंप ने ईरान के भविष्य को लेकर समझौते की संभावना भी जताई। उन्होंने कहा कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान के साथ डील हो सकती है। साथ ही उन्होंने ईरान के सामने समझौते या और कठोर कार्रवाई के विकल्प की बात कही। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के साथ संघर्ष और कूटनीतिक प्रयास दोनों जारी हैं।
होर्मुज से 1 अरब बैरल तेल निकालने का दावा
ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य से *1 अरब से अधिक बैरल तेल* बाहर निकालने में मदद की है। उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद अब सबसे ज्यादा तेल यहां से निकल रहा है और अमेरिकी नौसेना रोजाना कई जहाजों को बाहर निकालने में मदद कर रही है।
दुनिया से ईरान के आर्थिक बहिष्कार की अपील
ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब तक ईरान व्यावसायिक जहाजों पर हमले बंद नहीं करता, परमाणु महत्वाकांक्षाओं को नहीं छोड़ता और आतंकी संगठनों को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक उसके खिलाफ कड़े आर्थिक प्रतिबंध जारी रहने चाहिए।
‘अमेरिका इज बैक’
भाषण की शुरुआत में ट्रंप ने अमेरिकी ताकत को लेकर कहा, ‘अमेरिका इज बैक और आज हमारा देश इतिहास में सबसे ज्यादा मजबूत स्थिति में है’. उन्होंने अपनी सरकार की सीमा और आर्थिक नीतियों का जिक्र करते हुए दावा किया कि अमेरिका पहले से अधिक सुरक्षित और मजबूत स्थिति में है। व्हाइट हाउस ने भी भाषण के बाद जारी बयान में ट्रंप के संदेश को अमेरिकी ताकत और संप्रभुता पर केंद्रित बताया।
8 युद्ध और विवाद सुलझाने का दावा
ट्रंप ने अपनी विदेश नीति की उपलब्धियां गिनाते हुए दावा किया कि राष्ट्रपति पद संभालने के बाद उन्होंने आठ अलग-अलग युद्धों और विवादों को सुलझाने में भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि जहां दूसरे नेता केवल शांति की बातें करते रहे, वहीं उनके प्रशासन ने कार्रवाई की। हालांकि ये आंकड़ा और इसके आधार पर सफलता का आकलन ट्रंप का स्वयं का दावा है।
वेनेजुएला और तेल को लेकर बड़ा दावा
ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल को लेकर भी बड़ा दावा किया और 65 अरब बैरल तेल से जुड़े एक बड़े समझौते का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में कमी आ सकती है और बड़ी तेल कंपनियां वेनेजुएला में निवेश कर रही हैं। भाषण में उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा और तेल आपूर्ति को अमेरिकी रणनीति से जोड़कर पेश किया।
क्यूबा और ग्रीनलैंड पर भी बोले
क्यूबा के कम्युनिस्ट शासन की आलोचना करते हुए ट्रंप ने उसके भविष्य को लेकर कड़ा बयान दिया। वहीं ग्रीनलैंड के संदर्भ में उन्होंने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एक सुरक्षा समझौते का जिक्र किया और कहा कि वहां दो बड़े अमेरिकी सैन्य अड्डे बनाए जाएंगे। इस व्यवस्था को उन्होंने अमेरिका और यूरोप की सुरक्षा तथा NATO के लिए महत्वपूर्ण बताया। ग्रीनलैंड संबंधी समझौते पर डेनमार्क की ओर से संसदीय मंजूरी की जरूरत का भी उल्लेख किया गया है।
ICC और संयुक्त राष्ट्र पर भी निशाना
ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत (ICC) की कड़ी आलोचना की और कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों या नागरिकों पर ऐसे किसी ट्रिब्यूनल में मुकदमा नहीं चलने देगा, जिसका अमेरिका पर कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने ICC के सदस्य देशों से संस्था से बाहर निकलने की अपील भी की।
UN बजट में कटौती का दावा
संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत बताते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने इतिहास में पहली बार यूएन के बजट में 15 प्रतिशत की कटौती की है। अपने पूरे संबोधन में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की मौजूदा व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और वैश्विक शासन के तरीकों पर भी सवाल उठाए।
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